👉 मरीजों की शिकायतों के लिए सरकार जारी करे स्पष्ट हेल्पलाइन — पीड़ित को न्याय और वैध रकम की वापसी की प्रक्रिया हो तेज
बिलासपुर। निजी अस्पतालों में इलाज कराने वाले मरीजों और उनके परिजनों से जुड़ी शिकायतों को लेकर समय-समय पर गंभीर सवाल उठते रहे हैं। चिकित्सा लापरवाही, इलाज के दौरान मृत्यु, बिलिंग, उपचार की जानकारी, मेडिकल रिकॉर्ड और मरीजों से लिए जाने वाले विभिन्न शुल्क जैसे मामलों में यदि कोई शिकायत सामने आती है तो उसकी निष्पक्ष और कानूनन जांच होना बेहद जरूरी है।


बिलासपुर में एक चिकित्सा लापरवाही मामले में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने पिछली जांच को वैधानिक प्रक्रिया के अनुरूप नहीं पाए जाने पर नए सिरे से जांच कराने का निर्देश दिया था। इससे यह सवाल भी सामने आता है कि ऐसी शिकायतों की जांच कानून में निर्धारित प्रक्रिया और विशेषज्ञता के साथ होना कितनी महत्वपूर्ण है।
दोष सिद्ध हो तो लाइसेंस पर हो कड़ी कार्रवाई
जनहित में मांग है कि यदि किसी निजी अस्पताल के खिलाफ जांच में गंभीर और प्रमाणित अनियमितता, नियमों का उल्लंघन या अन्य वैधानिक दोष पाए जाते हैं, तो संबंधित कानूनों के तहत लाइसेंस/पंजीयन पर निलंबन, निरस्तीकरण या अन्य उचित कार्रवाई की जाए।
हालांकि केवल शिकायत के आधार पर किसी अस्पताल को दोषी घोषित नहीं किया जाना चाहिए। पहले निष्पक्ष जांच, संबंधित पक्ष को सुनवाई और उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण जरूरी है।
मरीज को नुकसान हुआ तो राहत और रकम वापसी की प्रक्रिया तेज हो
जहां सक्षम प्राधिकारी, न्यायालय या संबंधित वैधानिक मंच द्वारा अस्पताल की जिम्मेदारी निर्धारित होती है, वहां पीड़ित को उपलब्ध कानून के अनुसार मुआवजा, उपचार खर्च या अन्य वैध आर्थिक राहत की कार्रवाई जल्द पूरी की जाए।
साथ ही अस्पतालों के मेडिकल रिकॉर्ड, बिल, जांच रिपोर्ट, दवाइयों का विवरण और उपचार से संबंधित दस्तावेज सुरक्षित रखने की व्यवस्था मजबूत हो, ताकि शिकायत की जांच वास्तविक रिकॉर्ड के आधार पर हो सके।
सरकार सभी शिकायतों के लिए स्पष्ट हेल्पलाइन सार्वजनिक करे
छत्तीसगढ़ की CM हेल्पलाइन 1076 नागरिक शिकायतों के लिए उपलब्ध है। आधिकारिक पोर्टल के अनुसार यह शिकायत दर्ज कराने और उसकी स्थिति जानने की सुविधा देता है।
जनहित में उपयोगी संपर्क:
- CM हेल्पलाइन — 1076
- नागरिक कॉल सेंटर — 155300
- NIDAAN शिकायत हेल्पलाइन — 1100
- NIDAAN WhatsApp — 7065051100
- बिलासपुर जिला प्रशासन — 07752-223344
सरकार को चाहिए कि निजी अस्पतालों से संबंधित शिकायतों के लिए स्वास्थ्य विभाग का एक स्पष्ट जिला स्तरीय हेल्पलाइन नंबर भी सार्वजनिक करे, ताकि आम मरीज को यह पता रहे कि चिकित्सा संबंधी शिकायत कहां और किस अधिकारी के पास करनी है।
हर गंभीर शिकायत की समयबद्ध समीक्षा हो
प्रशासन द्वारा गंभीर शिकायतों में आवश्यकतानुसार—
मेडिकल रिकॉर्ड → बिलिंग रिकॉर्ड → उपचार की आवश्यकता → डॉक्टर/विशेषज्ञ की राय → अस्पताल की अनुमति/पंजीयन → संबंधित सरकारी योजना के दावे → मरीज/परिजन का पक्ष
इन सभी पहलुओं की जांच की जाए।
सरकार से 7 सूत्रीय जनहित मांग
1. बिलासपुर के निजी अस्पतालों की नियमित एवं शिकायत-आधारित जांच हो।
2. गंभीर शिकायतों के लिए विशेषज्ञ जांच समिति की व्यवस्था मजबूत हो।
3. दोष सिद्ध होने पर कानून के अनुसार अस्पताल के लाइसेंस/पंजीयन पर कार्रवाई हो।
4. मरीज को उपलब्ध कानूनी प्रक्रिया के अनुसार मुआवजा/रकम वापसी दिलाने की कार्रवाई तेज हो।
5. मेडिकल रिकॉर्ड और बिलिंग में पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए।
6. सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं के दावों की नियमानुसार जांच और ऑडिट हो।
7. शिकायतकर्ता को शिकायत नंबर देकर कार्रवाई की स्थिति ऑनलाइन या हेल्पलाइन से जानने की सुविधा मिले।
मरीज और उसका परिवार बीमारी के समय सबसे कमजोर स्थिति में होता है। इसलिए स्वास्थ्य सेवा में पारदर्शिता, जवाबदेही और कानून का पालन केवल प्रशासनिक विषय नहीं, बल्कि जनहित का महत्वपूर्ण मुद्दा है।
सत्य ज्ञान समागम न्यूज लाइव की जनहित मांग:
“इलाज के नाम पर यदि कहीं कानून का उल्लंघन हुआ है तो निष्पक्ष जांच हो, दोष सिद्ध होने पर कड़ी वैधानिक कार्रवाई हो और पीड़ित को कानून के अनुसार न्याय एवं आर्थिक राहत जल्द मिले।”
न पक्ष, न विपक्ष — केवल निष्पक्ष
सत्य ज्ञान समागम न्यूज लाइव










