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प्रतिबंध के बावजूद सोशल मीडिया पर सक्रिय महादेव सट्टा ऐप के विज्ञापन, प्रशासन की चुप्पी पर सवाल….

🌍 रायपुर / नई दिल्ली:देशभर में चर्चित और जांच एजेंसियों की रडार पर रहा महादेव सट्टा ऐप एक बार फिर विवादों में है। हैरानी की बात यह है कि प्रवर्तन निदेशालय (ED), CBI और राज्य पुलिस की जांच के बावजूद इस अवैध सट्टा ऐप के विज्ञापन आज भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स (Facebook, WhatsApp, Instagram, Telegram आदि) पर खुलेआम चल रहे हैं।सूत्रों के अनुसार, सोशल मीडिया पर “जल्दी जुड़ें”, “आसान कमाई”, “गारंटीड रिटर्न” जैसे भ्रामक संदेशों के जरिए युवाओं को इस सट्टा ऐप से जोड़ा जा रहा है। यह न केवल कानून का खुला उल्लंघन है, बल्कि समाज और युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ भी है।कानूनन प्रतिबंधित होने के बावजूद कैसे चल रहा है विज्ञापन?महादेव सट्टा ऐप को लेकर पहले ही यह स्पष्ट हो चुका है कि:यह ऐप अवैध ऑनलाइन सट्टेबाजी से जुड़ा हैहजारों करोड़ रुपये के लेन-देन और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप जांच में सामने आएकेंद्र सरकार द्वारा ऐसे ऐप्स को ब्लॉक करने के निर्देश दिए जा चुके हैंइसके बावजूद, सवाल यह उठता है कि👉 सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स इन विज्ञापनों को कैसे अनुमति दे रहे हैं?👉 IT Act और Cyber Law के तहत अब तक कड़ी कार्रवाई क्यों नहीं हुई?🧑‍🎓 युवाओं को बनाया जा रहा है शिकारविशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के सट्टा ऐप्स:युवाओं को आर्थिक बर्बादी की ओर धकेल रहे हैंकर्ज, अपराध और मानसिक तनाव को बढ़ावा दे रहे हैंकई परिवार पूरी तरह तबाह हो चुके हैंयह सिर्फ एक ऐप का मामला नहीं, बल्कि सामाजिक आपातस्थिति बनती जा रही है। जनहित में प्रशासन से मांगन्यूज़ पोर्टल एवं जागरूक नागरिकों की ओर से मांग की जाती है कि:1️⃣ महादेव सट्टा ऐप से जुड़े सभी सोशल मीडिया विज्ञापन तत्काल बंद किए जाएं

2️⃣ ऐसे विज्ञापन चलाने वाले पेज, ग्रुप और लिंक को तुरंत ब्लॉक किया जाए

3️⃣ सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर कानूनी कार्रवाई और भारी जुर्माना लगाया जाए

4️⃣ आम जनता को सट्टा ऐप्स के खिलाफ जागरूक करने के लिए अभियान चलाया जाए📢 अपीलयदि आप भी सोशल मीडिया पर महादेव सट्टा ऐप या किसी अन्य सट्टा ऐप का विज्ञापन देखें, तो:उसे तुरंत Report करेंस्थानीय पुलिस, साइबर सेल और प्रशासन को सूचित करेंऐसे लालच से दूर रहें✍️ निष्कर्षमहादेव सट्टा ऐप का सोशल मीडिया पर सक्रिय रहना प्रशासन और टेक कंपनियों दोनों के लिए चेतावनी है।अब समय आ गया है कि सिर्फ जांच नहीं, बल्कि ठोस और त्वरित कार्रवाई हो — ताकि आने वाली पीढ़ी को इस जहर से बचाया जा सके।