बिलासपुर / सिरगिट्टी | सत्य ज्ञान समागम प्रेस न्यूज
बिलासपुर के औद्योगिक क्षेत्र सिरगिट्टी में संचालित एक पान मसाला पैकिंग यूनिट को लेकर स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है। सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के अनुसार यहां “के पान सुगंध” नाम से संचालित इकाई में राजश्री पान मसाला, कमला पसंद सहित कई पान मसालों की पैकिंग किए जाने की बात सामने आ रही है। हैरानी की बात यह है कि इतने बड़े स्तर पर गतिविधियां होने के बावजूद जिला प्रशासन और संबंधित विभागों की ओर से अब तक कोई ठोस कार्रवाई दिखाई नहीं दे रही है।
दुर्गंध और डस्ट से परेशान सिरगिट्टी के लोग
स्थानीय लोगों का कहना है कि फैक्ट्री से निकलने वाली तेज दुर्गंध और धूल (डस्ट) के कारण पूरे सिरगिट्टी क्षेत्र का वातावरण प्रभावित हो रहा है। जब फैक्ट्री से डस्ट निकलता है तो पूरे इलाके में बदबू फैल जाती है, जिससे लोगों को सांस लेने में भारी तकलीफ होती है।
लोगों का कहना है कि इससे दमा, श्वास और अन्य स्वास्थ्य संबंधी बीमारियों का खतरा लगातार बना हुआ है। छोटे बच्चों और बुजुर्गों के लिए यह स्थिति और भी खतरनाक साबित हो सकती है।
रजिस्ट्रेशन और वैधता पर भी सवाल
सूत्रों का दावा है कि संबंधित इकाई का जिला उद्योग केंद्र में रजिस्ट्रेशन नहीं होने की जानकारी सामने आई है। बताया जा रहा है कि इस संबंध में एक अधिकारी द्वारा लिखित जानकारी भी दी गई है। ऐसे में बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि यदि रजिस्ट्रेशन नहीं है तो इतना बड़ा उद्योग आखिर किसके संरक्षण में संचालित हो रहा है और संबंधित विभागों को इसकी जानकारी क्यों नहीं है।
मजदूरों के अधिकार और सुरक्षा पर भी प्रश्नचिन्ह
सूत्रों के अनुसार फैक्ट्री में काम करने वाले मजदूरों की संख्या, उनके पीएफ, ईएसआई और अन्य श्रम कानूनों के तहत मिलने वाली सुविधाओं को लेकर भी स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है।
धूल और डस्ट वाले वातावरण में काम करने वाले मजदूरों के लिए स्वास्थ्य सुरक्षा और इलाज की क्या व्यवस्था है, और क्या किसी अस्पताल से इलाज के लिए टाई-अप किया गया है – यह भी एक बड़ा सवाल बना हुआ है।
वाणिज्यकर विभाग, गृह विभाग और अन्य एजेंसियों पर भी सवाल
इतने बड़े स्तर पर पान मसाला पैकिंग का काम होने की जानकारी सामने आने के बाद अब सवाल राज्य के वाणिज्यकर विभाग, गृह विभाग, श्रम विभाग और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की कार्यप्रणाली पर भी उठ रहे हैं।
लोगों का कहना है कि यदि यहां बड़े पैमाने पर उत्पादन और पैकिंग हो रही है तो टैक्स, लाइसेंस, पर्यावरण अनुमति और श्रम कानूनों की निगरानी करने वाले विभाग अब तक मौन क्यों हैं।
प्रशासन की चुप्पी पर उठ रहे बड़े सवाल
क्या इस यूनिट के पास सभी आवश्यक लाइसेंस और अनुमति है?
यदि नहीं है तो इतने समय से यह संचालन कैसे हो रहा है?
क्या संबंधित विभागों की अनदेखी के कारण यह स्थिति बनी हुई है?
और क्या इस मामले में उच्च स्तरीय जांच होगी?
अब सबकी नजर सरकार और प्रशासन पर
इस खबर के सामने आने के बाद अब देखने वाली बात यह होगी कि राज्य के वाणिज्यकर मंत्री, गृह मंत्री, जिला प्रशासन, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और श्रम विभाग इस पूरे मामले पर क्या कदम उठाते हैं और क्या सिरगिट्टी क्षेत्र के लोगों को प्रदूषण और स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों से राहत दिलाने के लिए ठोस कार्रवाई की जाती है या नहीं।