देशभर में आगामी 2027 की जनगणना को लेकर एक संदेश सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें लोगों से अपील की जा रही है कि वे अपनी मातृभाषा के साथ-साथ ज्ञात भाषाओं में “संस्कृत” को भी शामिल करें।
वायरल संदेश में दावा किया गया है कि पिछली जनगणना में संस्कृत बोलने वालों की संख्या बहुत कम दर्ज हुई थी, जिसके कारण इस प्राचीन भाषा के संरक्षण और विकास पर प्रभाव पड़ सकता है। संदेश में यह भी कहा गया है कि संस्कृत भारत की प्राचीन भाषा होने के साथ धार्मिक अनुष्ठानों और शास्त्रों से जुड़ी हुई है, इसलिए इसे जीवित रखना सभी की जिम्मेदारी है।
हालांकि, इस संबंध में आधिकारिक तौर पर किसी भी सरकारी विभाग या जनगणना प्राधिकरण की ओर से ऐसी कोई अनिवार्यता या निर्देश जारी नहीं किए गए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि जनगणना के दौरान नागरिकों को अपनी जानकारी सही और तथ्यात्मक रूप से ही देनी चाहिए।
फिलहाल यह संदेश जागरूकता के रूप में साझा किया जा रहा है, लेकिन इसकी सत्यता और दावों को लेकर स्पष्ट पुष्टि नहीं हुई है।



