बिलासपुर छत्तीसगढ़

न्यायधानी बिलासपुर के दयालबंद स्थित मधुबन बॉम्बे आवास को लेकर एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। सूत्रों और स्थानीय लोगों के अनुसार यहां बने 400 से अधिक क्वार्टरों के आवंटन और उपयोग को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
सूत्रों का दावा है कि इन क्वार्टरों में कई लोग सेटिंग के जरिए रह रहे हैं, जबकि असली पात्र लोगों को अभी भी आवास नहीं मिल पा रहा है। इतना ही नहीं, यहां किराया माफिया के सक्रिय होने की भी चर्चा है। आरोप है कि कई लोग क्वार्टरों को कब्जे में लेकर तीन हजार से पांच हजार रुपये तक मासिक किराया वसूल रहे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि बहुत से परिवार किराया देकर इन क्वार्टरों में रह रहे हैं, वहीं कुछ लोग बिना किसी प्रक्रिया के फ्री में भी रह रहे हैं, जिससे पूरी व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं। कुछ लोगों का यह भी आरोप है कि क्वार्टर दिलाने के नाम पर उनसे लगभग 80 हजार रुपये तक की राशि ली गई।
सूत्रों के अनुसार इस परिसर में रहने वाले कुछ लोग संदिग्ध भी हो सकते हैं, जिससे सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई जा रही है। ऐसे में यह मामला केवल आवास आवंटन तक सीमित नहीं रह गया है बल्कि प्रशासनिक निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर रहा है।
स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि न्यायधानी बिलासपुर में न्याय व्यवस्था और प्रशासनिक कार्यवाही पूरी तरह पारदर्शी रहनी चाहिए। इसलिए इस पूरे मामले की निष्पक्ष और गहन जांच कर सच्चाई सामने लाई जानी चाहिए।
लोगों ने मुख्यमंत्री, गृहमंत्री, डीजीपी और संबंधित विभागों से मांग करते है कि इस पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच कराई जाए और यदि किसी भी प्रकार की अनियमितता या अवैध वसूली सामने आती है तो दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए।
बताया जा रहा है कि छत्तीसगढ़ के अन्य शहरों में भी इसी प्रकार की आवास योजनाएं संचालित हैं, ऐसे में यह जांच केवल एक परिसर तक सीमित न रहकर पूरे प्रदेश में की जानी चाहिए ताकि आवास योजनाओं में पारदर्शिता बनी रहे और जरूरतमंद लोगों को उनका अधिकार मिल सके।
(सत्य ज्ञान समागम प्रेस न्यूज पोर्टल / पत्रकार संघ भारत)