सत्य ज्ञान समागम प्रेस न्यूज
📍 बिलासपुर (छत्तीसगढ़)
बिलासपुर शहर में निजी स्कूलों की मनमानी एक बार फिर चर्चा में है। शहर के कई प्राइवेट स्कूलों के खिलाफ अभिभावकों ने गंभीर आरोप लगाए हैं कि उन्हें जबरन स्कूल द्वारा तय की गई दुकानों से ही यूनिफॉर्म, जूते, किताबें और अन्य सामग्री खरीदने के लिए मजबूर किया जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार, इन तय दुकानों और स्कूल प्रबंधन के बीच कमीशन का खेल चल रहा है, जिसके चलते बाजार में सस्ती उपलब्ध सामग्री भी अभिभावकों को महंगे दामों पर खरीदनी पड़ रही है। इससे मध्यम वर्गीय परिवारों पर आर्थिक बोझ लगातार बढ़ रहा है।
🔍 अभिभावकों की प्रमुख शिकायतें: 👉 यूनिफॉर्म, जूते और किताबें केवल तय दुकानों से खरीदने का दबाव
👉 खुले बाजार में सस्ता सामान उपलब्ध होने के बावजूद खरीद पर रोक
👉 निजी प्रकाशकों की महंगी किताबें थोपना
👉 बंडल सिस्टम के जरिए अनावश्यक सामग्री की बिक्री
👉 स्कूल और दुकानों के बीच कमीशन की आशंका
⚖️ नियमों की अनदेखी का आरोप
शिक्षा नियमों के अनुसार किसी भी स्कूल को अभिभावकों पर विशेष दुकान से खरीदारी के लिए दबाव बनाने का अधिकार नहीं है। इसके बावजूद शहर में यह प्रथा खुलेआम जारी है, जिससे शिक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
🔥 बड़ा सवाल: क्या बिलासपुर में भी चल रहा है “शिक्षा वसूली सिस्टम”?
जिस तरह अन्य जिलों में निजी स्कूलों की जांच में अनियमितताएं सामने आई हैं, उसी तरह बिलासपुर में भी बड़े स्तर पर जांच की मांग उठ रही है।
🇮🇳 प्रशासन से मांग:
👉 जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा तत्काल जांच अभियान चलाया जाए
👉 दोषी स्कूलों पर सख्त कार्रवाई और जुर्माना लगाया जाए
👉 अभिभावकों को स्वतंत्र रूप से खरीदारी का अधिकार सुनिश्चित किया जाए
👉 शिक्षा को व्यापार बनने से रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं
📢 जनहित में अपील:
यदि आपके बच्चे के स्कूल में भी इस तरह की जबरदस्ती या वसूली हो रही है, तो संबंधित विभाग में शिकायत दर्ज कराएं। जागरूक अभिभावक ही इस व्यवस्था को बदल सकते हैं।
✍️ प्रधान संपादक:
सतपाल सिंह भदराजा
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