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🏠 होम छत्‍तीसगढ समाचार पद्म विभूषण तीजन बाई के निधन से संगीत…

पद्म विभूषण तीजन बाई के निधन से संगीत जगत स्तब्ध: क्या अब छत्तीसगढ़ के प्रमुख जिलों में स्थापित होगी उनकी प्रतिमा?

छत्तीसगढ़ की माटी की शान, पंडवानी की विश्व प्रसिद्ध लोक गायिका और पद्म विभूषण से सम्मानित तीजन बाई अब हमारे बीच नहीं रहीं। 5 जुलाई को उन्होंने अंतिम सांस ली। तीजन बाई लंबे समय से बीमार चल रही थीं। एम्स (AIIMS) में उन्होंने अपनी आखिरी सांस ली।तीजन बाई का जाना छत्तीसगढ़ के लिए एक अपूरणीय क्षति है। पंडवानी को विश्व के मानचित्र पर स्थापित करने वाली इस महान कलाकार के निधन की खबर के बाद पूरे देश में शोक की लहर है।क्या अब प्रशासन लेगी बड़ा फैसला?तीजन बाई के निधन के बाद अब यह सवाल उठ खड़ा हुआ है—क्या छत्तीसगढ़ के प्रमुख जिलों में उन्हें उचित सम्मान देने के लिए प्रशासन आगे आएगा? आम जनमानस में अब यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या तीजन बाई के नाम पर प्रमुख जिलों के चौक-चौराहों का नामकरण होगा? क्या राज्य के बड़े शहरों के प्रमुख चौराहों पर उनकी भव्य प्रतिमाएं स्थापित की जाएंगी?यह प्रतिमाएं न केवल उन्हें सम्मान देंगी, बल्कि इसके माध्यम से आने वाली पीढ़ियों को भी उनकी पूरी जानकारी मिलेगी कि कैसे उन्होंने छत्तीसगढ़ की पंडवानी को गाकर देश-दुनिया में छत्तीसगढ़ का नाम रोशन किया था।लोक कला की मशाल, तीजन बाई का सफरतीजन बाई ने न केवल पंडवानी गायन को नई ऊंचाइयां दीं, बल्कि उन्होंने पुरुष प्रधान लोक कला शैली में अपनी जगह बनाकर नारी शक्ति का बेहतरीन उदाहरण पेश किया। उन्होंने अपनी ओजस्वी आवाज से ‘महाभारत’ के प्रसंगों को जीवंत कर दिया था। भारत सरकार ने उन्हें पद्म श्री, पद्म भूषण और पद्म विभूषण से सम्मानित कर उनके योगदान को नमन किया था।अब जब वे हमारे बीच नहीं हैं, तो कलाप्रेमियों की यह मांग जोर पकड़ रही है कि आने वाली पीढ़ियां उन्हें याद रखें, इसके लिए उनके नाम पर स्मारकों और प्रतिमाओं का निर्माण अनिवार्य है।क्या प्रशासन इस दिशा में कोई ठोस निर्णय लेगा? क्या लोक गायिका की स्मृति को चिरस्थायी बनाने के लिए उनके नाम पर शहर के मुख्य चौक-चौराहों का नाम रखा जाएगा? यह प्रश्न अब सरकार और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर निर्भर है।इस दुखद घड़ी में, प्रदेश का हर नागरिक उस आवाज को नमन करता है जिसने छत्तीसगढ़ की पंडवानी को विश्व के कोने-कोने तक पहुँचाया।