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🏠 होम › छत्‍तीसगढ समाचार › बिलासपुर में कोचिंग सेंटरों पर प्रशासन सख्त: लखनऊ…

बिलासपुर में कोचिंग सेंटरों पर प्रशासन सख्त: लखनऊ हादसे के बाद जागी नींद, अब स्कूलों की भी जांच की मांग..!

बिलासपुर। लखनऊ के एक कोचिंग सेंटर में लगी भीषण आग में 15 छात्रों की दर्दनाक मौत की घटना ने न केवल उत्तर प्रदेश बल्कि पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। इस दुखद हादसे के बाद अब छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में प्रशासन पूरी तरह से सतर्क हो गया है। बिलासपुर में कोचिंग सेंटरों के खिलाफ बड़े पैमाने पर सुरक्षा ऑडिट और चेकिंग अभियान चलाया जा रहा है।


कोचिंग सेंटरों पर कार्रवाई का दौर
शहर भर में चल रहे इस विशेष अभियान के तहत, नगर निगम और दमकल विभाग की टीमें विभिन्न कोचिंग संस्थानों का औचक निरीक्षण कर रही हैं। जांच के दौरान जिन संस्थानों में अग्नि सुरक्षा (Fire Safety) के मानकों का अभाव पाया जा रहा है, उन्हें तत्काल प्रभाव से नोटिस थमाया जा रहा है। साथ ही, जिन सेंटरों में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम बिल्कुल नहीं हैं, उन्हें प्रशासन द्वारा सील करने की कार्रवाई की जा रही है।
सुधार के लिए सख्त निर्देश
प्रशासन ने उन कोचिंग सेंटरों को कुछ दिनों का सीमित समय दिया है जहां छोटी-मोटी खामियां पाई गई हैं। इन संस्थानों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि वे निर्धारित समयावधि के भीतर फायर एक्सटिंग्विशर, आपातकालीन निकास द्वार और अन्य सुरक्षा कवच सुनिश्चित करें। प्रशासन ने साफ चेतावनी दी है कि सुरक्षा मानकों से समझौता करने वाले किसी भी संस्थान को बख्शा नहीं जाएगा।
आम जनता और अभिभावकों की मांग: “स्कूलों की भी हो जांच”
कोचिंग सेंटरों पर हो रही इस कार्रवाई के बीच अब बिलासपुर के प्रबुद्ध नागरिकों और अभिभावकों ने एक बड़ी मांग उठाई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सुरक्षा का दायरा केवल कोचिंग सेंटरों तक ही सीमित नहीं रहना चाहिए। शहर के निजी और सरकारी स्कूलों में भी हजारों बच्चे शिक्षा ग्रहण करते हैं, जहां सुरक्षा व्यवस्था की स्थिति का पता लगाना अनिवार्य है।
स्थानीय निवासियों का तर्क है कि यदि स्कूलों में फायर सेफ्टी, मजबूत स्ट्रक्चरल ऑडिट और बच्चों की सुरक्षा के अन्य मापदंड पूरे नहीं पाए जाते हैं, तो उन पर भी तत्काल सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। अभिभावकों ने मांग की है कि प्रशासन स्कूलों के लिए भी एक विशेष ऑडिट टीम गठित करे और जहां भी कमी मिले, उसे समय रहते दुरुस्त कराया जाए ताकि किसी भी अनहोनी को होने से रोका जा सके।
बहरहाल, बिलासपुर प्रशासन की यह सख्ती शहर में बच्चों की सुरक्षा के प्रति एक सकारात्मक कदम मानी जा रही है, लेकिन अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या यह अभियान स्कूलों तक भी विस्तार पाता है या नहीं।