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पान मसाला पैकेजिंग पर सख्ती के आदेश के बाद बड़ा सवाल..!

आदेश जारी, पैकेजिंग बदलना होगा… अब खाद्य विभाग कार्रवाई करेगा या मामला ठंडे बस्ते में जाएगा?

नई दिल्ली/विशेष रिपोर्ट। पान मसाला की पैकेजिंग को लेकर जारी नए प्रावधानों ने पान मसाला उद्योग के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है। प्लास्टिक, सिंथेटिक पॉलिमर और एल्युमिनियम फॉयल जैसी पैकेजिंग सामग्री के इस्तेमाल को लेकर सख्ती के बाद कंपनियों को अपनी पैकेजिंग व्यवस्था में बदलाव करना पड़ सकता है।

नए नियमों के मुताबिक पैकेजिंग के लिए निर्धारित और अनुमत सामग्री का इस्तेमाल करना होगा। यानी अब पारंपरिक प्लास्टिक पाउच की जगह पेपर, पेपरबोर्ड, सेलुलोज, टिन के डिब्बे या कांच जैसे विकल्पों की ओर कंपनियों को बढ़ना पड़ सकता है।

आदेश जारी… अब अमल की बारी

सबसे बड़ा सवाल अब यह है कि आदेश जारी होने के बाद खाद्य विभाग जमीन पर कितनी सख्ती दिखाता है?

क्या विभाग बाजार में बिक रहे पान मसाला उत्पादों की पैकेजिंग की जांच करेगा?
क्या कंपनियों के स्टॉक और पैकेजिंग यूनिट का निरीक्षण होगा?
क्या नियमों का उल्लंघन मिलने पर नोटिस और कानूनी कार्रवाई होगी?
या फिर जांच-पड़ताल केवल कागजों तक सीमित रह जाएगी?

इन सवालों को लेकर अब आम उपभोक्ताओं के साथ-साथ कारोबारियों की भी नजर खाद्य विभाग की कार्रवाई पर है।

पान मसाला उद्योगपतियों पर कार्रवाई की चुनौती

नियमों में बदलाव के बाद सबसे बड़ी जिम्मेदारी उन कंपनियों की है जो अभी भी प्रतिबंधित अथवा निर्धारित मानकों के विपरीत पैकेजिंग का इस्तेमाल करती हैं। यदि किसी कंपनी द्वारा नियमों का पालन नहीं किया जाता है तो खाद्य सुरक्षा कानून और संबंधित पैकेजिंग/कचरा प्रबंधन प्रावधानों के तहत कार्रवाई का रास्ता खुल सकता है।

लेकिन सवाल केवल नियम बनाने का नहीं, नियमों को लागू कराने का है।

खाद्य विभाग की भूमिका पर उठे सवाल

पान मसाला का कारोबार बड़े पैमाने पर होने के कारण इस पूरे मामले में खाद्य विभाग की जिम्मेदारी महत्वपूर्ण हो जाती है। विभाग को यह देखना होगा कि बाजार में बिक रहे उत्पाद निर्धारित पैकेजिंग मानकों के अनुरूप हैं या नहीं।

अगर आदेश के बावजूद पुरानी पैकेजिंग में उत्पाद बाजार में पहुंचते हैं, तो क्या जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा कार्रवाई की जाएगी? यही वह सवाल है जिसका जवाब आने वाले दिनों में सामने आएगा।

सत्य ज्ञान समागम की विशेष रिपोर्ट

आदेश जारी हो चुका है, अब असली परीक्षा अमल की है।
पान मसाला कंपनियों को पैकेजिंग में बदलाव करना पड़ेगा—लेकिन बड़ा सवाल यह है कि खाद्य विभाग उद्योगपतियों पर नियमों का डंडा चलाएगा या फिर नोटिस और कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू होने से पहले ही मामला ठंडे बस्ते में चला जाएगा?

अब निगाहें खाद्य विभाग की अगली कार्रवाई पर हैं।
नियम किताबों में रहेंगे या बाजार में भी दिखाई देंगे—यह आने वाला समय तय करेगा।