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🏠 होम › क्राइम › ग्राम पंचायत दर्राभाठा में अवैध उत्खनन और फर्जी…

ग्राम पंचायत दर्राभाठा में अवैध उत्खनन और फर्जी बिल का गंभीर मामला, मानवाधिकार सहायता संस्थान ने कलेक्टर को सौंपा आवेदन…

बिलासपुर:-ग्राम पंचायत दर्राभाठा में सरपंच एलत घृतलहरे द्वारा किए गए कथित अवैध उत्खनन और फर्जी बिल भुगतान का गंभीर मामला सामने आया है। इस संबंध में श्री देवानंद सोनवानी, मानवाधिकार सहायता संस्थान के माध्यम से जिला कलेक्टर बिलासपुर को लिखित आवेदन देकर मामले की निष्पक्ष जांच एवं दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की गई है।

आवेदन में बताया गया है कि ग्राम पंचायत दर्राभाठा में दो बोर कराए गए हैं। पहला बोर लगभग 120 फीट और दूसरा बोर 200 फीट गहराई तक किया गया। दोनों ही बोर से दलदल निकला, इसके बावजूद न तो किसी प्रकार की कसिंग पाइप डाली गई, न ही पटाई (बंद करने का कार्य) किया गया। दोनों बोर पूरी तरह खुले छोड़ दिए गए हैं, जिससे किसी भी समय अनहोनी या बड़ी दुर्घटना होने की आशंका बनी हुई है।

आवेदन में यह भी उल्लेख है कि उत्खनन कार्य में किसी प्रकार की सॉकेट वेल्डिंग या सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया गया। इसके बावजूद सरपंच द्वारा गांव के लोगों को यह बताया गया कि बोर उत्खनन में भारी खर्च हुआ है।

फर्जी बिल भुगतान का आरोप लगाते हुए बताया गया कि एक बोर में ₹1,12,454 और दूसरे बोर में ₹1,13,870 का खर्च दर्शाया गया, जबकि वर्तमान दरों के अनुसार एक बोर का वास्तविक खर्च लगभग ₹27,200 ही होता है। इस प्रकार कुल ₹1,99,124 की राशि का फर्जी तरीके से आहरण किए जाने का आरोप है।

आवेदन में यह भी कहा गया है कि दोनों बोर एक ही स्थान पर निजी बोरिंग मशीन संचालक से कराए गए, लेकिन कागजों में अलग-अलग स्थान दर्शाए गए हैं, जिससे पूरे मामले में गंभीर अनियमितता और भ्रष्टाचार की आशंका गहराती है।

मानवाधिकार सहायता संस्थान ने जिला प्रशासन से मांग की है कि पूरे प्रकरण की तत्काल जांच कराई जाए तथा सरपंच एवं संबंधित जिम्मेदारों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में पंचायत स्तर पर इस तरह की लापरवाही और भ्रष्टाचार पर रोक लग सके।