👉 कथित भू-माफिया पर कार्रवाई के साथ राजस्व रिकॉर्ड, सीमांकन और पुराने नामांतरणों की भी हो जांच

🌍 रायपुर/बिलासपुर। छत्तीसगढ़ में तालाब, निस्तारी भूमि, श्मशान/मरघट तथा अन्य सार्वजनिक उपयोग की जमीनों पर अतिक्रमण, मिट्टी भराई, अवैध निर्माण और जमीन के स्वरूप में बदलाव को लेकर समय-समय पर शिकायतें और समाचार सामने आते रहे हैं। कुछ मामलों में प्रशासनिक स्तर पर जांच और कार्रवाई के निर्देश भी दिए गए हैं।

ऐसे में जनहित में मांग है कि किसी एक शिकायत तक सीमित रहने के बजाय पूरे छत्तीसगढ़ में तालाबों, निस्तारी भूमि और श्मशान/मरघट की जमीन का विशेष सत्यापन अभियान चलाया जाए।
रिकॉर्ड और मौके की जमीन का हो मिलान
सरकार प्रत्येक जिले में राजस्व रिकॉर्ड के आधार पर ऐसी जमीनों की पहचान करे और मौके पर सीमांकन कराकर यह देखा जाए कि—
- रिकॉर्ड में तालाब दर्ज है तो मौके पर तालाब सुरक्षित है या नहीं।
- निस्तारी भूमि का वास्तविक उपयोग किस रूप में हो रहा है।
- श्मशान/मरघट की भूमि पर कोई अवैध कब्जा या निर्माण तो नहीं।
- तालाब में मिट्टी भरकर जमीन का स्वरूप बदला गया है या नहीं।
- सरकारी अथवा सार्वजनिक भूमि पर निजी निर्माण तो नहीं हुआ।
- भूमि के पुराने रिकॉर्ड, नामांतरण और हस्तांतरण की प्रक्रिया नियमों के अनुसार हुई या नहीं।
- कहीं फर्जी दस्तावेज अथवा गलत जानकारी के आधार पर भूमि का स्वरूप बदलने का प्रयास तो नहीं किया गया।
कथित भू-माफिया नेटवर्क की भी जांच हो
यदि किसी मामले में जांच के दौरान यह सामने आता है कि सार्वजनिक या सरकारी भूमि पर संगठित तरीके से कब्जा, फर्जी दस्तावेज, अवैध प्लॉटिंग, धोखाधड़ी या अधिकारियों की मिलीभगत हुई है, तो केवल कब्जा हटाने तक कार्रवाई सीमित नहीं रहनी चाहिए।
ऐसे मामलों में उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर संबंधित व्यक्तियों, बिचौलियों, दस्तावेज तैयार करने वालों तथा अन्य सहयोगियों की भूमिका की जांच कर लागू कानूनों के तहत कार्रवाई की जानी चाहिए।
अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आए
यदि किसी सार्वजनिक भूमि पर वर्षों से अतिक्रमण है और शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नहीं हुई, तो संबंधित अवधि के रिकॉर्ड और शिकायतों की समीक्षा की जाए।
जानबूझकर लापरवाही, मिलीभगत या नियमों के उल्लंघन का प्रमाण मिलने पर संबंधित अधिकारी या कर्मचारी के खिलाफ भी विभागीय एवं कानूनी कार्रवाई की जाए।
हालांकि केवल अतिक्रमण मौजूद होने से किसी अधिकारी को दोषी नहीं माना जा सकता। जिम्मेदारी साक्ष्य और जांच के आधार पर ही निर्धारित होनी चाहिए।
तालाब की जमीन की खरीद-बिक्री पर भी हो जांच
यदि किसी तालाब, निस्तारी या सार्वजनिक उपयोग की भूमि को निजी जमीन बताकर बेचने, खरीदने, प्लॉट काटने या निर्माण कराने की शिकायत है, तो राजस्व रिकॉर्ड और संबंधित दस्तावेजों की जांच हो।
सिर्फ रजिस्ट्री या दस्तावेज उपलब्ध होने को जमीन के सार्वजनिक स्वरूप में वैध बदलाव का अंतिम प्रमाण नहीं माना जाना चाहिए। भूमि की मूल प्रकृति और वैधानिक स्थिति की जांच सक्षम राजस्व प्राधिकारी द्वारा की जानी चाहिए।
अतिक्रमण प्रमाणित हो तो जमीन वापस सुरक्षित की जाए
जहां सक्षम प्राधिकारी की जांच में अतिक्रमण प्रमाणित हो, वहां लागू कानून और निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार—
सीमांकन → नोटिस/सुनवाई → वैधानिक आदेश → अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई → भूमि को सुरक्षित करना
की प्रक्रिया पूरी की जाए।
छत्तीसगढ़ भू-राजस्व कानूनों में सरकारी/सार्वजनिक भूमि से अतिक्रमण हटाने से संबंधित प्रावधान मौजूद हैं; किसी मामले में लागू धारा और कार्रवाई जमीन के रिकॉर्ड एवं तथ्यों के अनुसार तय की जानी चाहिए।
जनता के सामने आए जिलेवार रिपोर्ट
सरकार प्रत्येक जिले के लिए एक सार्वजनिक रिपोर्ट जारी करने पर विचार करे, जिसमें—
कुल तालाबों की संख्या, दर्ज क्षेत्रफल, सीमांकन की स्थिति, अतिक्रमण की शिकायतें, जांच की स्थिति, हटाए गए अतिक्रमण और लंबित मामलों
की जानकारी उपलब्ध हो।
इससे जनता को पता चलेगा कि उसके गांव, वार्ड या शहर की सार्वजनिक भूमि सुरक्षित है या नहीं।
शिकायत के लिए अलग व्यवस्था की मांग
सरकार तालाब, श्मशान, निस्तारी एवं सरकारी भूमि से संबंधित शिकायतों के लिए एक स्पष्ट हेल्पलाइन/ऑनलाइन पोर्टल उपलब्ध कराए, जहां नागरिक फोटो, वीडियो, खसरा नंबर और स्थान की जानकारी के साथ शिकायत कर सकें तथा उन्हें शिकायत क्रमांक और कार्रवाई की स्थिति मिल सके।
सरकार से 10 सूत्रीय जनहित मांग
1. पूरे छत्तीसगढ़ में तालाब और निस्तारी भूमि का विशेष सर्वे हो।
2. श्मशान/मरघट की जमीन का भी सीमांकन कराया जाए।
3. राजस्व रिकॉर्ड और मौके की स्थिति का मिलान हो।
4. संदिग्ध नामांतरण, हस्तांतरण और भूमि-स्वरूप परिवर्तन की जांच हो।
5. अवैध प्लॉटिंग और निर्माण की शिकायतों की जांच हो।
6. संगठित अतिक्रमण पाए जाने पर पूरे नेटवर्क की जांच हो।
7. दोष सिद्ध होने पर संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ कानूनन कार्रवाई हो।
8. प्रमाणित अतिक्रमण हटाकर सार्वजनिक भूमि को पुनः सुरक्षित किया जाए।
9. अधिकारियों की भूमिका भी साक्ष्यों के आधार पर जांची जाए।
10. पूरी कार्रवाई की जिलेवार रिपोर्ट जनता के सामने रखी जाए।
तालाब केवल जमीन नहीं, जनता की विरासत हैं
तालाब, निस्तारी भूमि और श्मशान/मरघट किसी व्यक्ति विशेष की निजी सुविधा नहीं, बल्कि अनेक स्थानों पर समुदाय और सार्वजनिक आवश्यकता से जुड़े संसाधन हैं। इनके अतिक्रमण से जल संरक्षण, पर्यावरण, सार्वजनिक उपयोग और भविष्य की पीढ़ियों के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं।
इसलिए मांग किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि सार्वजनिक संपत्ति की सुरक्षा और कानून के समान पालन की है।
सरकार से सीधा सवाल
क्या छत्तीसगढ़ सरकार प्रदेश के सभी प्रमुख तालाबों, निस्तारी भूमि और श्मशान/मरघट की जमीन का विशेष सीमांकन कराकर राजस्व रिकॉर्ड और मौके की वास्तविक स्थिति की जांच करेगी?
और यदि जांच में अतिक्रमण, अवैध कब्जा, फर्जीवाड़ा या संगठित भूमि घोटाला प्रमाणित होता है, तो क्या दोषियों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई कर सार्वजनिक जमीन वापस सुरक्षित की जाएगी?
जनहित में यह जांच जरूरी है—क्योंकि आज तालाब और मरघट की जमीन बचाई जाएगी, तभी आने वाली पीढ़ियों के लिए सार्वजनिक जमीन और जलस्रोत सुरक्षित रहेंगे।
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