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वन विभाग में कथित भ्रष्टाचार को लेकर…!

कवर्धा से कोंडागांव तक गूंज रहे डीएफओ चुना मनी के कारनामे, कर्मचारियों ने खोला मोर्चा – जांच अब तक लंबित


कवर्धा / कोंडागांव


वन विभाग में कथित भ्रष्टाचार को लेकर एक बार फिर बड़ा मामला चर्चा में है। कवर्धा वन मंडल में अपने कार्यकाल के दौरान विवादों में रहे तत्कालीन डीएफओ चुना मनी के खिलाफ अब कोंडागांव वन मंडल में भी कर्मचारियों ने मोर्चा खोल दिया है। बताया जा रहा है कि कोंडागांव वन मंडल के कई कर्मचारी उनकी कार्यप्रणाली और निर्णयों से असंतुष्ट हैं और उनके खिलाफ आवाज उठाने लगे हैं।
सूत्रों के अनुसार पंडरिया उपवन मंडल में उनके कार्यकाल के दौरान लाखों-करोड़ों रुपये के भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के आरोप लंबे समय से सामने आते रहे हैं। इस संबंध में मीडिया और जनप्रतिनिधियों द्वारा कई बार शिकायत भी की गई, लेकिन आज तक इस मामले की जांच पूरी नहीं हो पाई है।
बताया जाता है कि पंडरिया उपवन मंडल में हुए कथित भ्रष्टाचार की शिकायत क्षेत्रीय विधायक तक भी पहुंचाई गई थी, लेकिन स्थानीय लोगों का आरोप है कि इतने गंभीर मामले के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई है। इससे क्षेत्र की जनता और वन विभाग के कर्मचारियों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।
अब कोंडागांव वन मंडल में भी कर्मचारियों द्वारा इस मामले को लेकर विरोध शुरू हो गया है। कर्मचारियों का कहना है कि यदि समय रहते ऐसे मामलों की निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो विभाग की साख पर गंभीर सवाल खड़े हो सकते हैं।
सूत्रों की मानें तो पंडरिया उपवन मंडल में डीएफओ चुना मनी के कार्यकाल के दौरान हुए कई कार्यों और वित्तीय लेनदेन की जांच अभी भी लंबित है, जिससे कई महत्वपूर्ण सवाल आज भी अनुत्तरित हैं।
मुख्यमंत्री और वन मंत्री से कार्रवाई की मांग
स्थानीय जनप्रतिनिधियों, ग्रामीणों और कर्मचारियों ने राज्य के मुख्यमंत्री और वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से मांग की है कि पूरे मामले की उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाए, ताकि विभाग में पारदर्शिता बनी रहे और भ्रष्टाचार पर लगाम लग सके।
उठ रहे बड़े सवाल
पंडरिया उपवन मंडल में हुए कथित भ्रष्टाचार की जांच अब तक पूरी क्यों नहीं हुई?
यदि शिकायतें की गई थीं तो अब तक जिम्मेदारों पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
क्या वन विभाग के उच्च अधिकारी इस मामले को गंभीरता से लेकर निष्पक्ष जांच कराएंगे?