बिलासपुर: कागजों पर ‘भारी वाहन निषेध’, सड़कों पर ‘मौत’ का तांडव; मानिकपुर धूमा में अवैध उत्खनन के खिलाफ फूटा ग्रामीणों का गुस्सा…!

बिलासपुर। नियम केवल फाइलों की शोभा बढ़ा रहे हैं या धरातल पर भी लागू हैं? बिलासपुर के ग्राम पंचायत मानिकपुर धूमा में हालात देखकर तो यही लगता है कि प्रशासन की सख्ती सिर्फ बोर्ड तक सीमित है। जिस सड़क के मुहाने पर साफ लिखा है— ‘भारी वाहन निषेध’, वहां दिन-रात भारी-भरकम हाईवा मौत बनकर दौड़ रहे हैं। अवैध मिट्टी उत्खनन के इस खेल से तंग आकर अब ग्रामीणों ने ‘आर-पार की जंग’ छेड़ दी है।
भारतमाला प्रोजेक्ट की आड़ में ‘अवैध’ खेल?

मामला मानिकपुर मुख्य मार्ग का है। ग्रामीणों का गंभीर आरोप है कि धूमा गांव से बड़े पैमाने पर अवैध मिट्टी का उत्खनन किया जा रहा है और इसे भारतमाला प्रोजेक्ट में खपाया जा रहा है। चौंकाने वाली बात यह है कि जिस मार्ग पर भारी वाहनों का प्रवेश वर्जित है, वहां प्रशासन की नाक के नीचे ये हाईवा 24 घंटे फर्राटा भर रहे हैं।

20 साल का इंतजार और जर्जर सड़क का दर्द
यह वही सड़क है जो पिछले दो दशकों से अपनी बदहाली पर आंसू बहा रही है। ग्रामीणों का कहना है:

- सड़क का टेंडर पास हो चुका है, लेकिन निर्माण अब तक शुरू नहीं हुआ।
- भारी वाहनों की आवाजाही ने इस रास्ते को कच्चे मार्ग से भी बदतर बना दिया है।
- इसी संकरी और जर्जर सड़क से स्कूली बच्चे, किसान और मजदूर गुजरते हैं, जिनके जीवन पर हमेशा खतरा मंडराता रहता है।
“आखिर किसके संरक्षण में नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं? क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है?” — ग्रामीणों का सीधा सवाल

ग्रामीणों ने रोका रास्ता, खनिज विभाग की बड़ी कार्रवाई
लगातार बढ़ती परेशानी और प्रशासन की अनदेखी से आज ग्रामीणों का सब्र टूट गया। दर्जनों की संख्या में ग्रामीणों ने सड़क पर उतरकर गाड़ियों का चक्काजाम कर दिया। माहौल गर्म होते देख खनिज विभाग की टीम मौके पर पहुंची और 04 हाईवा, 01 पोकलेन मशीन को कब्जे में लेकर खनिज विभाग की अभिरक्षा में रखा गया है और आगे की जांच जारी है।
इस दौरान बिल्हा जनपद सदस्य सभापति रमादेवी मौर्य भी मौके पर पहुंचीं। उन्होंने प्रशासनिक लापरवाही पर कड़ा रुख अपनाते हुए अधिकारियों को आड़े हाथों लिया और ग्रामीणों की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ न करने की चेतावनी दी।

बड़ा सवाल: क्या यह सिर्फ ‘खानापूर्ति’ है?
खनिज विभाग की इस कार्रवाई ने फिलहाल तो धूल उड़ाते पहियों को थाम दिया है, लेकिन ग्रामीण अब भी आशंकित हैं।
1. क्या यह कार्रवाई महज दिखावा है या अवैध उत्खनन पर पूर्ण विराम लगेगा?
2. क्या मानिकपुर धूमा के निवासियों को 20 साल के लंबे इंतजार के बाद एक सुरक्षित और पक्की सड़क नसीब होगी?
फिलहाल, ग्रामीणों ने साफ कर दिया है कि जब तक उनकी समस्याओं का स्थाई समाधान नहीं होता, उनका संघर्ष जारी रहेगा।



