बिलासपुर। साइबर अपराध और ‘म्यूल अकाउंट’ (Mule Account) नेटवर्क के खिलाफ बिलासपुर पुलिस ने बड़ी सफलता हासिल की है।तोरवा


पुलिस ने उन दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जो भोले-भाले लोगों को कमीशन का लालच देकर उनके बैंक खाते और पासबुक साइबर ठगों तक पहुंचाते थे। पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया है।कैसे पकड़ में आए आरोपी?तोरवा थाना प्रभारी निरीक्षक रजनीश सिंह ने बताया कि शुक्रवार, 29 मई 2026 को मुखबिर से सूचना मिली थी कि तितली चौक स्थित एसबीआई बैंक के पास एक संदिग्ध युवक लोगों को बैंक खाता और पासबुक देने पर कमीशन देने का प्रलोभन दे रहा है। सूचना मिलते ही पुलिस टीम ने घेराबंदी कर युवक को दबोच लिया।पकड़े गए युवक की पहचान बापूनगर निवासी प्रियांशु वस्त्रकार (20) के रूप में हुई। तलाशी के दौरान उसके मोबाइल में कई अलग-अलग लोगों के बैंक पासबुक, चेकबुक और खाता विवरण की तस्वीरें मिलीं। पूछताछ में उसने अपने साथी अनिल गजभिये (36), निवासी आर.के. नगर, सरकंडा का नाम उजागर किया।’म्यूल अकाउंट’ का खुलासाजांच में यह बात सामने आई है कि आरोपी संगठित होकर लोगों को झांसे में लेते थे। वे बैंक खातों को किराए पर लेने या खरीदने का काम करते थे, ताकि उन खातों का उपयोग साइबर ठगी और धोखाधड़ी के पैसों को खपाने (Money Laundering) के लिए किया जा सके। इसे तकनीकी भाषा में ‘म्यूल अकाउंट नेटवर्क’ कहा जाता है।पुलिस की कड़ी कार्रवाईतोरवा पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ बीएनएस की धारा 318(4) और 112 के तहत मामला दर्ज किया है। पुलिस अब आरोपियों के मोबाइल फोन का तकनीकी विश्लेषण कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि वे किन बड़े साइबर गिरोहों के संपर्क में थे। शनिवार को दोनों को न्यायालय में पेश किया गया, जहाँ से उन्हें जेल भेज दिया गया।पुलिस की जनता से अपील:बिलासपुर पुलिस ने नागरिकों को आगाह किया है कि वे अपने बैंक खाते, एटीएम या पासबुक किसी भी अनजान व्यक्ति को न दें और न ही किसी लालच में आकर अपना खाता किसी और को इस्तेमाल करने के लिए दें। ऐसा करना कानूनी अपराध है और आपके खाते का उपयोग गंभीर साइबर अपराधों में हो सकता है।



