ब्रेकिंग न्यूज़
मिलावट, निर्माण भ्रष्टाचार और अस्पतालों की गंभीर लापरवाही—जवाबदेही तय करने के लिए बने विशेष जनहित कानून…तोरवा पुलिस की बड़ी कार्रवाई: त्योहारी सीजन में चाकू लहराने वाले 3 आरोपी गिरफ्तार, 2024 से फरार स्थाई वारंटी भी दबोचा..!श्रीकृष्ण जन्माष्टमी: धर्म, सत्य और कर्म का संदेश देने वाला पावन पर्व..धर्म, संस्कृति, संस्कार और इतिहास : हमारी पहचान का आधार, वर्तमान की जिम्मेदारीपरंपरा को केवल याद करना नहीं, उसे जीवन में उतारना ही सच्चे संस्कार की पहचान…..न्यायधानी बिलासपुर में बारिश ने खोली विकास की पोल: जलभराव, गड्ढों और बदहाल सड़कों से जनता परेशान टैक्स के पैसे से होने वाले विकास कार्यों की गुणवत्ता पर उठे सवाल, सरकार और जांच एजेंसियों से जवाबदेही तय करने की मांग…10 लाख की ओपनिंग से 47 करोड़ तक पहुंची ‘हनुमान अंश’, आध्यात्मिक सिनेमा की बनी नई मिसाल नीम करोली बाबा के जीवन और संदेश से प्रेरित फिल्म को दर्शकों का मिल रहा जबरदस्त समर्थन …मुख्यमंत्री जी, अपराधी क्यों नहीं डर रहा कानून से❓बिलासपुर ग्रामीण में उदित सिंह को मिली नई जिम्मेदारी…..हमर पुलिस हमर गांव” अभियान: स्कूलों में पहुंची पुलिस, बच्चों को साइबर अपराध, यातायात और नए कानूनों की दी जानकारी बेमेतरा पुलिस ने …..तोरवा पुलिस की बड़ी कार्रवाई, राहगीरों को चाकू से डराने वाला आदतन बदमाश गिरफ्तार..!इतिहास, संस्कृति और स्वदेशी से आत्मनिर्भरता तक—‘मन की बात’ में देश की विकास यात्रा के विविध आयामों पर प्रधानमंत्री का संदेश…..छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड देगा ‘विश्व पर्यटन दिवस पुरस्कार-2026’10 श्रेणियों में उत्कृष्ट कार्य करने वालों का होगा सम्मान, 15 सितंबर तक कर सकेंगे आवेदन….मिलावट, निर्माण भ्रष्टाचार और अस्पतालों की गंभीर लापरवाही—जवाबदेही तय करने के लिए बने विशेष जनहित कानून…तोरवा पुलिस की बड़ी कार्रवाई: त्योहारी सीजन में चाकू लहराने वाले 3 आरोपी गिरफ्तार, 2024 से फरार स्थाई वारंटी भी दबोचा..!श्रीकृष्ण जन्माष्टमी: धर्म, सत्य और कर्म का संदेश देने वाला पावन पर्व..धर्म, संस्कृति, संस्कार और इतिहास : हमारी पहचान का आधार, वर्तमान की जिम्मेदारीपरंपरा को केवल याद करना नहीं, उसे जीवन में उतारना ही सच्चे संस्कार की पहचान…..न्यायधानी बिलासपुर में बारिश ने खोली विकास की पोल: जलभराव, गड्ढों और बदहाल सड़कों से जनता परेशान टैक्स के पैसे से होने वाले विकास कार्यों की गुणवत्ता पर उठे सवाल, सरकार और जांच एजेंसियों से जवाबदेही तय करने की मांग…10 लाख की ओपनिंग से 47 करोड़ तक पहुंची ‘हनुमान अंश’, आध्यात्मिक सिनेमा की बनी नई मिसाल नीम करोली बाबा के जीवन और संदेश से प्रेरित फिल्म को दर्शकों का मिल रहा जबरदस्त समर्थन …मुख्यमंत्री जी, अपराधी क्यों नहीं डर रहा कानून से❓बिलासपुर ग्रामीण में उदित सिंह को मिली नई जिम्मेदारी…..हमर पुलिस हमर गांव” अभियान: स्कूलों में पहुंची पुलिस, बच्चों को साइबर अपराध, यातायात और नए कानूनों की दी जानकारी बेमेतरा पुलिस ने …..तोरवा पुलिस की बड़ी कार्रवाई, राहगीरों को चाकू से डराने वाला आदतन बदमाश गिरफ्तार..!इतिहास, संस्कृति और स्वदेशी से आत्मनिर्भरता तक—‘मन की बात’ में देश की विकास यात्रा के विविध आयामों पर प्रधानमंत्री का संदेश…..छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड देगा ‘विश्व पर्यटन दिवस पुरस्कार-2026’10 श्रेणियों में उत्कृष्ट कार्य करने वालों का होगा सम्मान, 15 सितंबर तक कर सकेंगे आवेदन….
🔔

न्यूज़ अलर्ट चालू करें

ब्रेकिंग न्यूज़ की तुरंत जानकारी पाएं

💬
🏠 होम छत्‍तीसगढ समाचार मदकू द्वीप के प्राचीन मंदिरों पर बंदरों का…

मदकू द्वीप के प्राचीन मंदिरों पर बंदरों का बढ़ता खतरा, संरक्षण की मांग तेज..!

सरगांव- मुंगेली जिले के प्रसिद्ध पुरातात्विक एवं धार्मिक पर्यटन स्थल मदकू द्वीप में उत्खनन से प्राप्त प्राचीन मंदिरों और ऐतिहासिक अवशेषों के संरक्षण को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है। क्षेत्र के जागरूक नागरिकों एवं धरोहर प्रेमियों ने प्रशासन का ध्यान इस ओर आकर्षित करते हुए कहा है कि द्वीप में बंदरों की लगातार बढ़ती संख्या के कारण यहां स्थित प्राचीन मंदिरों और पुरातात्विक संरचनाओं को गंभीर नुकसान पहुंचने की आशंका उत्पन्न हो गई है।
मदकू द्वीप छत्तीसगढ़ की महत्वपूर्ण ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरों में से एक है। यहां पुरातत्व विभाग द्वारा किए गए उत्खनन में प्राचीन मंदिरों, मूर्तियों तथा स्थापत्य अवशेषों का अनावरण हुआ है,

जो प्रदेश के गौरवशाली इतिहास और समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा के साक्ष्य हैं। इन धरोहरों को देखने एवं दर्शन करने के लिए प्रतिवर्ष बड़ी संख्या में पर्यटक, शोधार्थी और श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं।
स्थानीय लोगों के अनुसार वर्तमान में द्वीप परिसर में बंदरों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। बंदरों के झुंड दिनभर उत्खनन से प्राप्त प्राचीन मंदिरों, शिलाखंडों और संरक्षित अवशेषों के ऊपर उछल-कूद करते रहते हैं। कई बार वे आपस में लड़ते-झगड़ते हुए मंदिरों की दीवारों, स्तंभों और नक्काशीदार पत्थरों पर चढ़ जाते हैं, जिससे इन पुरातात्विक संरचनाओं पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
धरोहर संरक्षण से जुड़े लोगों का कहना है कि ये मंदिर और संरचनाएं सदियों पुराने पत्थरों से निर्मित हैं। समय के प्रभाव और प्राकृतिक क्षरण के बाद अब ये अवशेष अत्यंत संवेदनशील अवस्था में हैं। ऐसे में बंदरों की निरंतर गतिविधियों के कारण पत्थरों का क्षरण तेज हो रहा है तथा कई स्थानों पर टूट-फूट की स्थिति भी दिखाई देने लगी है। यदि समय रहते उचित संरक्षण उपाय नहीं किए गए तो भविष्य में इन बहुमूल्य ऐतिहासिक धरोहरों को अपूरणीय क्षति पहुंच सकती है।
केवल धरोहरों की सुरक्षा ही नहीं, बल्कि पर्यटकों और श्रद्धालुओं की सुरक्षा भी एक महत्वपूर्ण विषय बन गया है। कई बार बंदरों के झुंड अचानक लोगों के पास पहुंच जाते हैं, जिससे भय और असुविधा की स्थिति उत्पन्न होती है। बच्चों और बुजुर्गों के लिए यह स्थिति विशेष रूप से चिंताजनक मानी जा रही है।
इस संबंध में प्रशासन से मांग की गई है कि वन विभाग और पुरातत्व विभाग के संयुक्त प्रयासों से बंदरों को सुरक्षित एवं वैज्ञानिक तरीके से किसी उपयुक्त वन क्षेत्र में स्थानांतरित करने की योजना बनाई जाए। साथ ही, उत्खनित मंदिरों और अन्य पुरातात्विक अवशेषों के चारों ओर जालीदार सुरक्षा घेरा अथवा अन्य प्रभावी सुरक्षात्मक संरचनाएं स्थापित की जाएं, ताकि बंदरों एवं अन्य जानवरों की पहुंच इन ऐतिहासिक धरोहरों तक न हो सके।
इसके अतिरिक्त धरोहरों की नियमित निगरानी और सुरक्षा के लिए पर्याप्त संख्या में सुरक्षाकर्मियों की तैनाती करने की भी मांग उठाई गई है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि मदकू द्वीप केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की ऐतिहासिक पहचान का महत्वपूर्ण केंद्र है। इसलिए इसकी सुरक्षा और संरक्षण सरकार, प्रशासन तथा समाज सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। मदकू द्वीप के सुरक्षा, संरक्षण एवं विकास के लिए साढ़े तीन दशक से कार्य कर रही श्री हरिहर क्षेत्र केदार द्वीप सेवा समिति मदकू के पदाधिकारियों ने आशा व्यक्त की है कि प्रशासन इस गंभीर विषय को प्राथमिकता से लेते हुए शीघ्र आवश्यक कदम उठाएगा, ताकि मदकू द्वीप की अमूल्य पुरातात्विक धरोहर आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखी जा सके।