बिलासपुर शहर का ऐतिहासिक कंपनी गार्डन, जो कभी शहरवासियों और बच्चों के लिए सुकून का केंद्र हुआ करता था, आज बदहाली और प्रशासनिक अनदेखी का जीता-जागता उदाहरण बन चुका है। 

कि:सुरक्षा का अभाव: गार्डन में बच्चों की सुरक्षा के लिए कुछ नहीं हैं बजट का दुरुपयोग: मेंटेनेंस के नाम पर आवंटित बजट आखिर कहाँ खर्च किया जा रहा है? इसकी उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए।प्रशासन की चुप्पी: क्या नगर निगम किसी और बड़े हादसे या किसी बड़ी अनहोनी का इंतजार कर रहा है?जनता की मांगबिलासपुर के जागरूक नागरिक अब नगर निगम के खिलाफ लामबंद हो रहे हैं। उनकी प्रमुख मांगें हैं:तत्काल मरम्मत: सभी जर्जर झूलों की तुरंत मरम्मत की जाए या उन्हें बदला जाए।
सुरक्षा ऑडिट: शहर के सभी उद्यानों का सुरक्षा ऑडिट करवाया जाए।जवाबदेही: इस लापरवाही के जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की जाए।चेतावनी: जब तक प्रशासन इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाता, तब तक अभिभावकों से अनुरोध है कि वे अपने बच्चों को इन खतरनाक झूलों से दूर रखें। बच्चों की सुरक्षा के साथ समझौता करना भविष्य के लिए घातक हो सकता है।



