🌍 बिलासपुर।बरसात शुरू होते ही न्यायधानी बिलासपुर के कई इलाकों में जलभराव, सड़क पर गड्ढे और बदहाल यातायात व्यवस्था ने शहर की व्यवस्थाओं की पोल खोल दी है। जिस शहर को स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित करने की बात कही जाती है, वहीं बारिश के दौरान अनेक स्थानों पर नागरिकों को पानी, कीचड़ और टूटती सड़कों के बीच आवागमन करना पड़ रहा है।सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी बारिश के मौसम में शहर की सड़कें और जलनिकासी व्यवस्था क्यों चरमरा जाती है?सड़क निर्माण, नाली निर्माण, सड़क चौड़ीकरण और अन्य विकास कार्यों के लिए सरकार के पास आने वाला पैसा जनता द्वारा दिए गए टैक्स का पैसा है। ऐसे में प्रत्येक रुपये के खर्च में गुणवत्ता, पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना सरकार और संबंधित विभागों की जिम्मेदारी है।गड्ढे सिर्फ परेशानी नहीं, दुर्घटना का कारण भीबारिश में सड़क के गड्ढों में पानी भर जाने से उनकी गहराई का अंदाजा नहीं लग पाता। इससे दोपहिया वाहन चालकों, पैदल राहगीरों, स्कूली बच्चों और बुजुर्गों के लिए दुर्घटना का खतरा बढ़ जाता है।कई जगह सड़क किनारे कीचड़ और पानी जमा होने से यातायात प्रभावित होता है। वहीं जलभराव से घरों और दुकानों तक पानी पहुंचने की स्थिति भी नागरिकों के लिए परेशानी का कारण बनती है।जांच एजेंसियां करें निर्माण कार्यों की जांचजनहित में यह जरूरी है कि संबंधित विभाग केवल कागजों पर काम पूरा घोषित करने के बजाय मौके पर जाकर निर्माण कार्यों की वास्तविक स्थिति की जांच करें।सरकार और जांच एजेंसियों को चाहिए कि—- पिछले कुछ वर्षों में बनी प्रमुख सड़कों और नालियों का भौतिक निरीक्षण कराया जाए।- निर्माण कार्यों की गुणवत्ता की स्वतंत्र तकनीकी जांच हो।- सड़क और नाली निर्माण में इस्तेमाल सामग्री की गुणवत्ता की जांच कराई जाए।- स्वीकृत राशि, टेंडर, भुगतान और वास्तविक कार्य का मिलान किया जाए।- जिन कार्यों में गंभीर अनियमितता या लापरवाही मिले, वहां जिम्मेदारी तय की जाए।- दोष सिद्ध होने पर संबंधित अधिकारी, जिम्मेदार ठेकेदार अथवा अन्य जिम्मेदार व्यक्ति के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाए।- खराब निर्माण को ठेकेदार से निर्धारित नियमों के तहत दुरुस्त कराया जाए।समस्या का समाधान क्या है?बारिश के बाद गड्ढे भर देना स्थायी समाधान नहीं है। शहर के लिए वैज्ञानिक और दीर्घकालिक ड्रेनेज प्लान तैयार किया जाना चाहिए।हर प्रमुख सड़क के लिए यह तय होना चाहिए कि बारिश का पानी कहां जाएगा, कितनी क्षमता की नाली चाहिए और पानी निकासी की व्यवस्था कितनी प्रभावी है।इसके साथ ही शहर में प्री-मानसून रोड एवं ड्रेनेज ऑडिट अनिवार्य किया जाना चाहिए। बारिश शुरू होने से पहले नालियों की सफाई, जल निकासी मार्गों की जांच और संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान की जाए।पूरे छत्तीसगढ़ के लिए भी बने जवाबदेही मॉडलयह समस्या केवल बिलासपुर की नहीं है। प्रदेश के अनेक शहरों और कस्बों में बारिश के दौरान जलभराव और खराब सड़कों की समस्या सामने आती है।इसलिए छत्तीसगढ़ सरकार को चाहिए कि प्रदेशभर में “बारिश पूर्व सड़क एवं जलनिकासी गुणवत्ता अभियान” चलाया जाए।हर जिले में खराब सड़कों, जलभराव वाले स्थानों और अधूरे अथवा खराब गुणवत्ता वाले निर्माण कार्यों की सूची सार्वजनिक की जा सकती है। इससे जनता को भी पता चलेगा कि किस काम पर कितना पैसा खर्च हुआ और उसकी जिम्मेदारी किस विभाग अथवा एजेंसी की है।जनता का पैसा, जनता के काम में—और जनता के प्रति जवाबदेही भीविकास केवल सड़क बनाने से नहीं होता। विकास तब माना जाएगा जब सड़क टिकाऊ हो, बारिश में पानी न भरे, नागरिक सुरक्षित चल सकें और सरकारी धन का सही उपयोग हो।सरकार से सवाल भी जरूरी है और समाधान के लिए सहयोग भी।जनता चाहती है कि राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से ऊपर उठकर बिलासपुर सहित पूरे छत्तीसगढ़ में विकास कार्यों की गुणवत्ता की निष्पक्ष समीक्षा हो।यदि किसी अधिकारी या ठेकेदार की लापरवाही जांच में प्रमाणित होती है तो नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए। साथ ही अच्छे काम करने वाले अधिकारियों और ठेकेदारों को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।न्यायधानी से संदेश साफ है—विकास चाहिए, लेकिन गुणवत्तापूर्ण और जवाबदेह विकास।सत्य ज्ञान समागम न्यूज़ लाइवजनहित की आवाज • व्यवस्था से सवाल • समाधान की पहल








