🌍 कोटा/बेलगहना (बिलासपुर):तहसील बेलगहना(विकासखंड कोटा) अंतर्गत ग्राम पंचायत लूफा में पाठशाला और चारागाह के लिए आरक्षित शासकीय भूमि पर कथित अवैध कब्जे और फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। लूफा ग्राम पंचायत की सरपंच श्रीमती अनामिका मेश्राम एवं ग्रामीणों ने राजस्व विभाग के पटवारी और पूर्व तहसीलदार पर गंभीर आरोप लगाते हुए अनुविभागीय अधिकारी (एसडीएम) कोटा को शिकायत पत्र सौंपा है। बिना पंचायत सूचना के नक्शा काटने व नाम चढ़ाने का आरोप शिकायत के अनुसार, ग्राम पंचायत लूफा स्थित खसरा नंबर 801/1(क) (रकबा लगभग 13 एकड़) वर्ष 1954-55 से शासकीय पाठशाला और चारागाह के लिए सुरक्षित रखी गई भूमि है। पूर्व में दोनों पक्षों के विवाद के चलते बेलगहना तहसीलदार द्वारा इस भूमि पर कथित तौर पर रोक (स्टे) लगाई गई थी।ग्रामीणों का आरोप है कि स्टे और आरक्षण के बावजूद, ग्राम पंचायत को बिना कोई सूचना दिए हल्का नंबर 09 के पटवारी रामकुमार चेलके और तत्कालीन बेलगहना तहसीलदार द्वारा मिलीभगत कर खसरा नंबर 801/1(क) को विभिन्न हिस्सों (801/25, 801/53 एवं 801/62) में विभाजित कर नक्शा काट दिया गया और जमीन को निजी नामों पर ऑनलाइन कंप्यूटर में दर्ज कर दिया गया।तीन हिस्सों में बांटी गई शासकीय जमीन
राजस्व दस्तावेजों के प्रिंटआउट के अनुसार, इस रकबे को कथित तौर पर तीन भाइयों—राजेश बाजपेयी, मनोज बाजपेयी एवं राजेन्द्र बाजपेयी (पिता विद्याधर बाजपेयी)—के नाम पर दर्ज किया गया दर्शाया गया है:


- खसरा नं. 801/25 – 2.3950 हेक्टेयर (राजेश बाजपेयी)
- खसरा नं. 801/53 – 0.3480 हेक्टेयर (राजेन्द्र बाजपेयी)
- खसरा नं. 801/62 – 2.1290 हेक्टेयर (मनोज बाजपेयी)
- कुल 18 एकड़ का था मामला, 5 एकड़ पर हुआ था विवाद ग्रामीणों का कहना है कि कुल मामला लगभग 18 एकड़ आरक्षित शासकीय भूमि का था, जिसमें से खसरा नंबर 802 (लगभग 5 एकड़) श्मशान/मुर्दावली की जमीन बताई गई है। शेष 13 एकड़ चरनोई व स्कूल की आरक्षित जमीन पर तहसीलदार के कथित मौखिक आदेश का हवाला देकर पटवारी द्वारा नक्शा काटकर नामांतरण/बंटवारा करने की बात कही जा रही है।कार्रवाई न होने पर उग्र आंदोलन और चक्काजाम की चेतावनी ग्राम पंचायत लूफा के सरपंच, पंच एवं समस्त ग्रामीणों ने एसडीएम और तहसीलदार को आवेदन देकर मांग की है कि उक्त शासकीय भूमि का तत्काल स्थल निरीक्षण व सीमांकन कर अवैध कब्जा हटाया जाए तथा फर्जी प्रविष्टियों को निरस्त किया जाए। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन द्वारा जल्द निष्पक्ष जांच कर शासकीय भूमि को मुक्त नहीं कराया गया, तो ग्रामीण कलेक्टर जनदर्शन में शिकायत करेंगे एवं उग्र आंदोलन व धरना-प्रदर्शन के लिए बाध्य होंगे।








