👉 वरिष्ठ और पुराने कलमकारों की अनदेखी पर उठे सवाल, उपमुख्यमंत्री अरुण साव के निवास पर उमड़ा मीडिया जगत; पत्रकारों के लिए एक स्थान और निश्चित समय तय करने की मांग


🌍 बिलासपुर/छत्तीसगढ़ :- साल में एक बार आने वाले दीपावली एवं धनतेरस के शुभ अवसर पर जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों और विभिन्न विभागों द्वारा पत्रकारों एवं मीडिया जगत के लोगों से मुलाकात और शुभकामना आदान-प्रदान का आयोजन किया जाता है। लेकिन इस बार भी सम्मान और मुलाकात की व्यवस्था को लेकर कई सवाल सामने आए।
आज उपमुख्यमंत्री श्री अरुण साव के निवास पर मीडिया जगत के लोगों का जमावड़ा देखने को मिला। इस दौरान अनेक पुराने, वरिष्ठ और नए पत्रकार साथियों से मुलाकात हुई। वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय कलमकार एक-दूसरे से मिले, लेकिन इसी बीच एक ऐसी स्थिति भी देखने को मिली, जिसने पत्रकारों के सम्मान और आपसी एकजुटता पर विचार करने के लिए मजबूर किया।
आखिर वरिष्ठ पत्रकारों को भी क्यों करना पड़ा इंतजार और भटकना?
सालभर जनहित, जनसमस्याओं, शासन-प्रशासन की कार्यप्रणाली और आम जनता की आवाज को सामने लाने वाले पत्रकारों के लिए जब सम्मान और मुलाकात का अवसर आता है, तो व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए कि किसी भी पत्रकार को अनावश्यक रूप से इधर-उधर भटकना न पड़े।
आज की स्थिति में फोटोग्राफर, संपादक और पत्रकार अलग-अलग समूहों में दिखाई दिए। वहीं कुछ स्थानों पर विभागीय मुलाकात और सम्मान को लेकर भी अलग-अलग व्यवस्थाएं नजर आईं। इस दौरान यह सवाल भी उठा कि क्या पत्रकारों के बीच पहचान, परिचय और व्यक्तिगत संबंधों को अधिक प्राथमिकता मिल रही है?
कुछ पत्रकारों का अनुभव रहा कि सम्मान और नजराना वितरण में सभी कलमकारों को समान अवसर नहीं मिल पाया। हालांकि, यह विषय संबंधित आयोजकों और विभागों के स्पष्टीकरण का भी है।
पत्रकारों के सम्मान के लिए क्या होनी चाहिए व्यवस्था?
इस पूरे विषय पर एक व्यावहारिक सुझाव सामने आता है कि सभी विभाग प्रमुख, जनप्रतिनिधि और संस्थान पत्रकारों से मुलाकात के लिए एक निश्चित स्थान और समय निर्धारित करें।
इससे:
- सभी पत्रकार निर्धारित समय पर पहुंच सकेंगे।
- वरिष्ठ और नए पत्रकारों को समान अवसर मिलेगा।
- संपादक, संवाददाता और फोटोग्राफर सभी की उपस्थिति सुनिश्चित हो सकेगी।
- विभाग प्रमुखों को भी बार-बार अलग-अलग स्थानों पर मुलाकात की परेशानी नहीं होगी।
- सम्मान, शुभकामना और आपसी संवाद की परंपरा व्यवस्थित एवं गरिमापूर्ण बनेगी।
सम्मान व्यक्ति देखकर नहीं, पत्रकारिता के योगदान को देखकर मिलना चाहिए।
पत्रकारिता केवल किसी पद, परिचय या संस्थान का नाम नहीं है। यह समाज के प्रति जिम्मेदारी, जनहित के मुद्दों को उठाने और लोकतंत्र में जनता की आवाज बनने का माध्यम है।
जो कलमकार वर्षों से समाजहित में काम कर रहे हैं, ग्रामीण क्षेत्रों से लेकर शहरों तक जनसमस्याओं को सामने ला रहे हैं, उन्हें भी सम्मान और संवाद में समान अवसर मिलना चाहिए।
यह किसी व्यक्ति या संस्था के विरोध का विषय नहीं, बल्कि पत्रकारिता जगत की गरिमा और एकजुटता से जुड़ा सवाल है।
आखिर सम्मान समारोह का उद्देश्य क्या केवल औपचारिक मुलाकात है या वास्तव में पत्रकारों के योगदान को सम्मान देना भी है?
इस पर जनप्रतिनिधियों, विभाग प्रमुखों और मीडिया संस्थानों को गंभीरता से विचार करना चाहिए।
हमारा संदेश: न पक्ष, न विपक्ष, केवल निष्पक्ष जनहित। पत्रकार का सम्मान उसकी पहचान से नहीं, उसके जनहित के कार्यों से होना चाहिए।
सतपाल सिंह भदराजा
प्रदेश अध्यक्ष/संस्थापक — न्यूज पोर्टल पत्रकार संघ भारत
प्रधान संपादक — सत्य ज्ञान समागम प्रेस








