👉 ढाबे, दुकानों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के नाम पर शासकीय भूमि पर कब्जे का मामला गंभीर; बिलासपुर हाईकोर्ट ने बेदखली का आदेश रखा बरकरार, अब प्रदेशभर में सरकारी जमीनों की निष्पक्ष जांच जरूरी
🌍 बिलासपुर :- सरकारी जमीन जनता की संपत्ति है, किसी व्यक्ति, कारोबारी या प्रभावशाली व्यक्ति की निजी जागीर नहीं। लेकिन प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में शासकीय भूमि पर अवैध कब्जे कर दुकानें, ढाबे, सैलून, गोदाम और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठान संचालित किए जाने की शिकायतें लगातार सामने आती रहती हैं। ऐसे मामलों में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का बेमेतरा जिले के ग्राम खैरा से जुड़ा फैसला प्रशासन और अतिक्रमणकारियों दोनों के लिए महत्वपूर्ण संदेश है।


ग्राम खैरा में लगभग 2100 वर्गफुट शासकीय भूमि पर ढाबा, टायर रिपेयरिंग दुकान और हेयर कटिंग सैलून संचालित किए जाने के मामले में हाईकोर्ट ने राजस्व अधिकारियों के बेदखली आदेश को बरकरार रखा है। अदालत ने स्पष्ट किया कि उपलब्ध राजस्व रिकॉर्ड और साक्ष्यों के आधार पर अवैध कब्जा साबित होने पर बेदखली की कार्रवाई में हस्तक्षेप का आधार नहीं बनता।
हालांकि, तहसीलदार द्वारा लगाया गया 25 हजार रुपये का जुर्माना अधिकार क्षेत्र से बाहर पाए जाने पर निरस्त किया गया और नए सिरे से जुर्माना तय करने के लिए मामला सक्षम अनुविभागीय अधिकारी को सौंपा गया।
सरकारी जमीन पर कब्जा आखिर किसके संरक्षण में?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि शासकीय भूमि पर पक्के निर्माण कैसे खड़े हो जाते हैं? सार्वजनिक जमीन पर व्यावसायिक गतिविधियां शुरू होने से पहले संबंधित राजस्व अमला क्या करता है? पटवारी, राजस्व निरीक्षक और तहसील कार्यालय के स्तर पर समय रहते निगरानी क्यों नहीं होती?
यदि किसी सरकारी भूमि पर वर्षों से कब्जा है, तो यह भी जांच का विषय है कि संबंधित अधिकारियों को इसकी जानकारी थी या नहीं। कहीं लापरवाही हुई या किसी स्तर पर संरक्षण मिला, इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। हालांकि, बिना प्रमाण किसी अधिकारी या व्यक्ति पर आरोप लगाना उचित नहीं होगा।
आम नागरिकों के अधिकारों पर भी पड़ता है असर
सरकारी जमीन पर अतिक्रमण केवल भूमि का मामला नहीं है। कई बार इससे किसानों के खेतों तक पहुंचने का रास्ता बंद हो जाता है, सार्वजनिक रास्ते संकरे हो जाते हैं, नालियां और जल निकासी प्रभावित होती हैं तथा आम नागरिकों को परेशानी उठानी पड़ती है।
इसलिए अतिक्रमण के मामलों को केवल राजस्व विभाग की फाइलों तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए। जहां सार्वजनिक हित प्रभावित हो रहा हो, वहां प्रशासन को प्राथमिकता के आधार पर कार्रवाई करनी चाहिए।
बिलासपुर सहित पूरे छत्तीसगढ़ में हो सरकारी जमीनों का सर्वे
जनहित में जिला प्रशासन और राजस्व विभाग से मांग है कि प्रदेशभर में शासकीय भूमि की स्थिति की समीक्षा कराई जाए।
- शासकीय भूमि पर हुए अवैध कब्जों का तहसीलवार सर्वे कराया जाए।
- सरकारी जमीन पर संचालित दुकानों, ढाबों, गोदामों और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की वैधानिक स्थिति जांची जाए।
- सरकारी रास्तों, तालाबों, चरागाहों, स्कूलों और सार्वजनिक उपयोग की जमीनों को प्राथमिकता से अतिक्रमण मुक्त कराया जाए।
- जहां राजस्व रिकॉर्ड में गड़बड़ी या संदिग्ध नामांतरण की शिकायत हो, वहां निष्पक्ष जांच की जाए।
- अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई में किसी प्रकार का राजनीतिक या आर्थिक भेदभाव न हो।
- अधिकारियों की लापरवाही प्रमाणित होने पर नियमानुसार जवाबदेही तय की जाए।
- कार्रवाई की प्रगति और अतिक्रमण मुक्त कराई गई भूमि का सार्वजनिक विवरण जारी किया जाए।
प्रशासन से सीधे सवाल
क्या जिला प्रशासन बिलासपुर और प्रदेश के अन्य जिलों में शासकीय भूमि पर हुए अतिक्रमण का व्यापक सर्वे कराएगा?
क्या सरकारी जमीन पर व्यावसायिक गतिविधियां संचालित करने वालों की वैधानिक स्थिति सार्वजनिक की जाएगी?
क्या आम नागरिकों की शिकायतों पर समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित होगी?
सरकारी जमीन बचाना केवल प्रशासन की नहीं, समाज की भी जिम्मेदारी
सरकारी जमीन किसी एक व्यक्ति की संपत्ति नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों की सार्वजनिक धरोहर है। इस पर अवैध कब्जा रोकना शासन, प्रशासन और समाज तीनों की जिम्मेदारी है। कानून का पालन गरीब और प्रभावशाली, दोनों के लिए समान होना चाहिए।
सत्य ज्ञान समागम न्यूज लाइव की जनहित में अपील है कि यदि आपके क्षेत्र में शासकीय भूमि पर अवैध कब्जे की जानकारी है, तो संबंधित राजस्व अधिकारी, तहसीलदार, एसडीएम या जिला कलेक्टर के समक्ष दस्तावेजों और प्रमाणों के साथ शिकायत दर्ज कराएं। कानून हाथ में न लें, बल्कि वैधानिक तरीके से कार्रवाई की मांग करें।
हमारा संकल्प — सरकारी संपत्ति की रक्षा, आम जनता के अधिकारों की सुरक्षा और भ्रष्टाचार एवं अनियमितताओं के विरुद्ध निष्पक्ष पत्रकारिता।
सत्य ज्ञान समागम न्यूज लाइव
न पक्ष, न विपक्ष — केवल निष्पक्ष जनहित।
जनहित सर्वोपरि।







