🌍 बिलासपुर, 30 अक्टूबर 2026 :- समाज में सकारात्मक बदलाव केवल सरकारी योजनाओं से नहीं, बल्कि लोगों की सोच और व्यवहार में परिवर्तन से संभव है। जब आम नागरिक स्वयं जागरूक होकर सामाजिक विकास में भागीदारी निभाएंगे, तभी शासकीय योजनाओं का वास्तविक लाभ जरूरतमंदों तक पहुंच सकेगा। यह बात कलेक्टर श्री संजय अग्रवाल ने मंथन सभागृह में आयोजित संभाग स्तरीय कार्यशाला के शुभारंभ अवसर पर कही।‘आप देंगे साथ तो बनेगी बात’ विषय पर आयोजित इस कार्यशाला का आयोजन यूनिसेफ, प्रकृति सेवा संस्थान बिलासपुर एवं एलायंस फॉर बिहेवियर चेंज के संयुक्त तत्वावधान में किया गया।


इसमें बिलासपुर संभाग के विभिन्न जिलों से स्वयंसेवी संगठनों, शिक्षण संस्थानों और शासकीय विभागों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।कलेक्टर संजय अग्रवाल ने कहा कि सकारात्मक व्यवहार परिवर्तन के लिए प्रत्येक व्यक्ति को स्वयं पहल करनी होगी। स्वयंसेवी संस्थाएं और युवा समाज में जागरूकता फैलाने के प्रभावी माध्यम बन सकते हैं। उन्होंने प्रतिभागियों से अपने व्यवहार में सकारात्मक बदलाव लाने और दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करने की अपील की।
जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री संदीप अग्रवाल ने विभिन्न शासकीय योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में सामुदायिक सहभागिता के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि लोगों की सक्रिय भागीदारी और सकारात्मक सोच से योजनाओं के परिणाम अधिक प्रभावी हो सकते हैं। इस अवसर पर नगर निगम आयुक्त श्री प्रकाश कुमार सर्वे भी उपस्थित रहे।यूनिसेफ के श्री अभिषेक सिंह ने कहा कि योजनाओं से जुड़ी उपयोगी जानकारियों को दैनिक जीवन में अपनाना जरूरी है। वहीं विषय विशेषज्ञ श्री चंदन कुमार ने उदाहरणों के माध्यम से बताया कि किसी भी योजना की सफलता के लिए लोगों की समझ, स्वीकार्यता और व्यवहार में उसका समावेश महत्वपूर्ण है।कार्यशाला में बिलासपुर, जांजगीर-चांपा, कोरबा, सक्ती, रायगढ़, मुंगेली एवं गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही जिले के स्वयंसेवी संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। युवोदय के सदस्य, सीएमडी कॉलेज एवं गर्ल्स कॉलेज के समाज कार्य विभाग के शिक्षक और विद्यार्थी, मीडिया प्रतिनिधि, अरपा रेडियो तथा महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारी-कर्मचारी भी शामिल हुए।
कार्यक्रम के अंत में प्रकृति सेवा संस्थान बिलासपुर के प्रमुख डॉ. राजीव अवस्थी ने सभी प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया।जनहित का संदेश: सरकारी योजनाओं की सफलता केवल बजट और कागजों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। इसके लिए प्रशासन, सामाजिक संगठनों, शिक्षण संस्थानों और आम नागरिकों को मिलकर जिम्मेदारी निभानी होगी। समाज में सकारात्मक बदलाव तभी आएगा, जब जागरूकता केवल चर्चा का विषय न रहकर लोगों के दैनिक व्यवहार का हिस्सा बनेगी।








