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सरकारी हेल्पलाइन नंबर सिर्फ दिखावे के लिए नहीं! जनता का फोन नहीं उठाने वाले अधिकारियों की तय हो जवाबदेही, केंद्र और राज्य सरकार जारी करें सख्त आदेश…

👉 पुलिस, स्वास्थ्य, बिजली, नगर निगम, राजस्व, परिवहन सहित सभी सरकारी विभागों के हेल्पलाइन नंबर पर अनिवार्य हो जवाब देने की व्यवस्था; बार-बार फोन नहीं उठाने और शिकायत लंबित रखने पर संबंधित अधिकारी से मांगा जाए जवाब

🌍 रायपुर/बिलासपुर :- देश में केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा जनता की सुविधा के लिए अलग-अलग विभागों के हेल्पलाइन नंबर जारी किए जाते हैं। इन नंबरों का उद्देश्य आम नागरिकों को सरकारी सेवाओं की जानकारी देना, उनकी समस्याएं सुनना और आपातकालीन परिस्थितियों में तत्काल सहायता उपलब्ध कराना है। लेकिन कई बार आम जनता की शिकायत रहती है कि सरकारी हेल्पलाइन नंबर पर फोन करने के बावजूद कॉल रिसीव नहीं होती। कई बार फोन लगातार व्यस्त रहता है, तो कहीं शिकायत दर्ज कराने के बाद भी उचित जवाब नहीं मिलता।

ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब सरकार ने जनता की सहायता के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं, तो उन नंबरों पर फोन उठाने और शिकायतों का समाधान करने की जिम्मेदारी आखिर किसकी है?

प्रधानमंत्री से लेकर मुख्यमंत्री तक पहुंचे जनता की आवाज

जनहित में केंद्र सरकार और सभी राज्य सरकारों से मांग है कि प्रत्येक सरकारी विभाग के लिए एक स्पष्ट और जवाबदेह हेल्पलाइन व्यवस्था लागू की जाए। इसके लिए प्रधानमंत्री, केंद्रीय प्रशासनिक सुधार एवं लोक शिकायत विभाग, सभी राज्यों के मुख्यमंत्री तथा मुख्य सचिवों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करने चाहिए।

सरकारी हेल्पलाइन केवल बोर्ड, वेबसाइट या विज्ञापन में नंबर प्रकाशित करने तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। जनता को वास्तविक सहायता मिलना सुनिश्चित किया जाना चाहिए।

हर सरकारी विभाग के लिए लागू हों ये पांच सख्त नियम

  1. फोन उठाने की अनिवार्यता: प्रत्येक सरकारी हेल्पलाइन पर निर्धारित कार्यालय समय अथवा घोषित सेवा समय के दौरान प्रशिक्षित कर्मचारी उपलब्ध रहें। आपातकालीन हेल्पलाइन चौबीसों घंटे संचालित रहें।
  2. कॉल नहीं उठने पर वैकल्पिक व्यवस्था: यदि संबंधित कर्मचारी किसी कारण से फोन नहीं उठा पाता है, तो कॉल दूसरे कर्मचारी या कंट्रोल रूम में स्थानांतरित हो। मिस्ड कॉल का रिकॉर्ड बने और निर्धारित समय में वापस कॉल किया जाए।
  3. शिकायत का पंजीयन अनिवार्य: हर शिकायतकर्ता को शिकायत क्रमांक दिया जाए, ताकि वह अपनी शिकायत की स्थिति जान सके।
  4. अधिकारी की जवाबदेही तय हो: बार-बार फोन नहीं उठाने, शिकायतों को जानबूझकर लंबित रखने अथवा गलत जानकारी देने की स्थिति में संबंधित कर्मचारी और प्रभारी अधिकारी से लिखित जवाब मांगा जाए।
  5. लापरवाही पर विभागीय कार्रवाई: जांच में जानबूझकर लापरवाही प्रमाणित होने पर नियमानुसार कारण बताओ नोटिस, चेतावनी, प्रतिकूल प्रविष्टि या अन्य विभागीय कार्रवाई की जाए।

हर महीने सार्वजनिक हो हेल्पलाइन की रिपोर्ट

सरकार को प्रत्येक विभाग की मासिक रिपोर्ट तैयार करवानी चाहिए, जिसमें निम्न जानकारी सार्वजनिक हो:

  • कुल कितने फोन आए?
  • कितने फोन का जवाब दिया गया?
  • कितनी कॉल मिस हुईं?
  • कितने लोगों को वापस फोन किया गया?
  • कितनी शिकायतें दर्ज हुईं?
  • कितनी शिकायतों का समाधान हुआ?
  • कितनी शिकायतें निर्धारित समय से लंबित हैं?
  • किन अधिकारियों के विरुद्ध लापरवाही की शिकायतें मिलीं और उन पर क्या कार्रवाई हुई?

इससे जनता को पता चलेगा कि सरकारी हेल्पलाइन वास्तव में काम कर रही है या केवल औपचारिकता निभाई जा रही है।

जनता को भी मिले अधिकारी तक शिकायत पहुंचाने का अधिकार

यदि किसी विभाग का हेल्पलाइन नंबर लगातार फोन करने पर भी जवाब नहीं देता, तो नागरिक को संबंधित विभाग के जिला अधिकारी, विभागीय नोडल अधिकारी और उससे वरिष्ठ अधिकारी तक शिकायत पहुंचाने की स्पष्ट सुविधा मिलनी चाहिए।

शिकायतकर्ता को यह भी अधिकार मिले कि वह कॉल का समय, तारीख और शिकायत क्रमांक के आधार पर लापरवाही की रिपोर्ट कर सके।

पहले से मौजूद व्यवस्था को भी प्रभावी बनाने की जरूरत

केंद्र सरकार के प्रशासनिक सुधार एवं लोक शिकायत विभाग द्वारा अगस्त 2024 में जारी व्यापक दिशा-निर्देशों में सरकारी शिकायतों के लिए CPGRAMS पोर्टल, विभागीय नोडल अधिकारी, अपीलीय अधिकारी और शिकायतों के समयबद्ध निपटारे की व्यवस्था शामिल है। केंद्र सरकार के दिशा-निर्देशों में सामान्यतः 21 दिनों के भीतर शिकायत निपटाने तथा अधिक समय लगने पर अंतरिम जवाब देने की व्यवस्था भी बताई गई है।

नागरिक केंद्र सरकार से संबंधित शिकायतें आधिकारिक पोर्टल https://pgportal.gov.in पर दर्ज कर सकते हैं। शिकायत का पंजीयन क्रमांक लेकर स्थिति देखी जा सकती है और असंतुष्ट होने पर अपील भी की जा सकती है।

लेकिन अब आवश्यकता है कि हेल्पलाइन पर फोन नहीं उठाने की समस्या को भी इसी जवाबदेही व्यवस्था से जोड़ा जाए। ।

सरकार से सीधे पांच बड़े सवाल

  1. जब जनता के लिए सरकारी हेल्पलाइन नंबर जारी किए जाते हैं, तो फोन नहीं उठाने की जिम्मेदारी किसकी है?
  2. क्या प्रत्येक विभाग में हेल्पलाइन की निगरानी के लिए जिम्मेदार अधिकारी नियुक्त है?
  3. क्या मिस्ड कॉल और अनुत्तरित शिकायतों का रिकॉर्ड वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंचता है?
  4. क्या लापरवाही करने वाले कर्मचारियों पर कार्रवाई का कोई स्पष्ट विभागीय प्रोटोकॉल बनाया जाएगा?
  5. क्या केंद्र और सभी राज्य सरकारें एक समान हेल्पलाइन जवाबदेही नीति लागू करेंगी?

जनता का फोन उठाना भी सरकारी सेवा का हिस्सा बने

सरकार का काम केवल योजनाएं बनाना और हेल्पलाइन नंबर जारी करना नहीं है। उन योजनाओं और सुविधाओं का लाभ आम आदमी तक पहुंचाना भी उतना ही जरूरी है।

एक गरीब व्यक्ति, बुजुर्ग, महिला, किसान, मजदूर या दुर्घटना में फंसा नागरिक जब सरकारी नंबर पर फोन करता है, तो उसके लिए वह कॉल बहुत महत्वपूर्ण हो सकती है। ऐसे में फोन नहीं उठने से उसकी परेशानी और बढ़ सकती है।

सरकार से मांग है कि सभी सरकारी विभागों के लिए हेल्पलाइन जवाबदेही नीति बनाई जाए, कॉल सेंटरों की नियमित निगरानी हो और लापरवाही प्रमाणित होने पर संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध नियमों के अनुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

क्योंकि सरकारी हेल्पलाइन जनता की सुविधा के लिए है, अधिकारियों की सुविधा के लिए नहीं।

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