बिलासपुर (छत्तीसगढ़)। न्यायधानी के टिकरापारा वार्ड स्थित ऐतिहासिक मामा-भांजा तालाब इन दिनों अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। रखरखाव के अभाव और प्रशासनिक उपेक्षा के चलते पूरा तालाब गंदगी के अंबार में तब्दील हो चुका है। तालाब के पानी पर जमी जलकुंभी और चारों तरफ फैले कचरे के कारण स्थानीय मोहल्लेवासी बेहद परेशान हैं। स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि इलाके में डेंगू और मलेरिया जैसी गंभीर महामारियों के फैलने का डर सताने लगा है।

तालाब के आस-पास भारी मात्रा में प्लास्टिक, घरेलू कचरा और डिस्पोजल सामग्री फेंकी जा रही है। पानी पूरी तरह से दूषित होकर काला पड़ चुका है, जिससे उठने वाली तीव्र बदबू के कारण आस-पास के घरों में रहना और राहगीरों का वहां से गुजरना मुश्किल हो गया है।मच्छरों का बढ़ा प्रकोप,
बीमारी फैलने की आशंकाबारिश का मौसम शुरू होते ही इस जमे हुए गंदे पानी में मच्छरों का भारी प्रकोप बढ़ गया है। मोहल्लेवासियों ने चिंता जताते हुए कहा:”तालाब की इस स्थिति के कारण पूरे टिकरापारा क्षेत्र में मच्छरों का आतंक है। बच्चों और बुजुर्गों के स्वास्थ्य पर सीधा खतरा मंडरा रहा है। अगर जल्द ही इस तालाब की सफाई नहीं की गई, तो वार्ड में डेंगू, मलेरिया और डायरिया जैसी बीमारियां पैर पसार लेंगी।”नगर निगम प्रशासन मौन, नागरिकों में आक्रोशस्थानीय नागरिकों का आरोप है कि इस संबंध में कई बार जिम्मेदार अधिकारियों का ध्यान आकर्षित कराया गया है, लेकिन नगर निगम प्रशासन की ओर से अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। सफाई के नाम पर केवल खानापूर्ति की जाती है।मोहल्लेवासियों की मांग:तालाब की तत्काल मुकम्मल सफाई कराई जाए और जलकुंभी हटाई जाए।मच्छरों के खात्मे के लिए वार्ड में एंटी-लावा और फॉगिंग मशीन का छिड़काव नियमित रूप से हो।तालाब के चारों ओर कचरा फेंकने वालों पर कड़ाई से जुर्माना लगाया जाए।अगर समय रहते बिलासपुर नगर निगम नहीं जागा, तो टिकरापारा के नागरिकों को किसी बड़ी स्वास्थ्य आपदा का सामना करना पड़ सकता है। स्थानीय निवासियों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही तालाब की सुध नहीं ली गई, तो वे उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।



