🌍 बिलासपुर।लोकतंत्र में पत्रकार केवल समाचार प्रकाशित करने वाला व्यक्ति नहीं, बल्कि जनता और शासन-प्रशासन के बीच सूचना का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। चाहे पत्रकार न्यूज पोर्टल, प्रिंट मीडिया या इलेक्ट्रॉनिक/टीवी मीडिया से जुड़ा हो, जमीनी खबर जुटाने के दौरान उसे कई बार दबाव, धमकी, विवाद और जोखिम का सामना करना पड़ता है।किसी भ्रष्टाचार, अवैध कब्जे, अपराध, नशे, सरकारी लापरवाही या जनसमस्या से जुड़ी खबर सामने लाना केवल कुछ पंक्तियां लिख देना नहीं है। इसके पीछे मौके पर जाना, लोगों से जानकारी लेना, दस्तावेज जुटाना, संबंधित अधिकारियों का पक्ष जानना, तथ्य की जांच करना और उसके बाद खबर प्रकाशित करना शामिल है।लेकिन सवाल यह है कि जब पत्रकार अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए जोखिम उठाता है और उसके साथ हमला, धमकी, दबाव या प्रताड़ना की घटना होती है, तब कार्रवाई कितनी प्रभावी होती है?भारतीय प्रेस परिषद के अनुसार प्रेस की स्वतंत्र कार्यप्रणाली में हस्तक्षेप तथा पत्रकार पर शारीरिक हमला जैसी शिकायतें उसके अधिकार क्षेत्र के विषयों में आती हैं। प्रेस परिषद ने पत्रकारिता के लिए आचार-संहिता और जिम्मेदार रिपोर्टिंग के मानक भी निर्धारित किए हैं।छत्तीसगढ़ में कानून मौजूद, फिर सवाल क्यों?छत्तीसगढ़ में छत्तीसगढ़ मीडिया कर्मी सुरक्षा अधिनियम, 2023 बनाया गया है। India Code में यह अधिनियम राज्य कानून के रूप में दर्ज है। कानून में मीडिया कर्मियों का पंजीयन, मीडिया स्वतंत्रता एवं संरक्षण से संबंधित समिति, अनुचित अभियोजन से सुरक्षा और अन्य प्रावधान शामिल हैं।ऐसे में आवश्यकता केवल कानून बनाने की नहीं, बल्कि उसकी जानकारी, प्रभावी क्रियान्वयन और शिकायतों पर समयबद्ध कार्रवाई की भी है।कार्रवाई दिखावे की नहीं, परिणाम की होयदि किसी पत्रकार के साथ उसके पेशेवर काम के दौरान धमकी, मारपीट, जबरदस्ती, उपकरण छीनने, समाचार रोकने का दबाव या अन्य प्रकार की हिंसा होती है, तो मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।सिर्फ आवेदन लेना, बयान दर्ज करना या औपचारिक कार्रवाई बताना पर्याप्त नहीं माना जाना चाहिए। पीड़ित पत्रकार को यह स्पष्ट जानकारी मिलनी चाहिए कि—- शिकायत पर कौन-सी कार्रवाई की गई?- जांच किस अधिकारी के पास है?- संबंधित धाराओं में मामला दर्ज हुआ या नहीं?- जांच की वर्तमान स्थिति क्या है?- दोषी पाए जाने पर कानून के अनुसार क्या कार्रवाई हुई?- पत्रकार की सुरक्षा के लिए तत्काल क्या कदम उठाए गए?पत्रकार भी कानून और आचार-संहिता के अधीनपत्रकारिता की स्वतंत्रता के साथ जिम्मेदारी भी जुड़ी है। प्रेस परिषद पत्रकारों से तथ्यपरक, सावधान और जिम्मेदार रिपोर्टिंग की अपेक्षा करता है।इसलिए पत्रकार को भी बिना पुष्टि के आरोप लगाने, किसी व्यक्ति की प्रतिष्ठा को अनावश्यक नुकसान पहुंचाने या भ्रामक समाचार प्रकाशित करने से बचना चाहिए। लेकिन पत्रकार की गलती का समाधान कानून के माध्यम से होना चाहिए, हिंसा या धमकी के माध्यम से नहीं।सरकार और प्रशासन से सीधा सवालक्या पत्रकार को अपनी जिम्मेदारी निभाने के लिए पहले सुरक्षा की गारंटी मांगनी पड़ेगी?क्या किसी खबर से असहमति होने पर जवाब समाचार या कानूनी प्रक्रिया से होगा, अथवा पत्रकार पर दबाव बनाया जाएगा?क्या मीडिया कर्मी सुरक्षा कानून का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जा रहा है?और सबसे बड़ा सवाल—पत्रकार की कलम स्वतंत्र होगी तो ही जनता तक सच पहुंच पाएगा।पत्रकारिता से जुड़े लोगों की सुरक्षा किसी एक संस्था, पोर्टल या समाचारपत्र का विषय नहीं है। यह प्रेस की स्वतंत्रता, जनता के सूचना के अधिकार और लोकतांत्रिक व्यवस्था में जवाबदेही से जुड़ा प्रश्न है।जरूरत इस बात की है कि कार्रवाई केवल कागजों में दिखाई न दे, बल्कि जमीन पर उसका परिणाम भी दिखाई दे।सत्य ज्ञान समागम न्यूज लाइव प्रेसजनहित • निष्पक्षता • जवाबदेही










