भारत में बसंत पंचमी का पर्व श्रद्धा, आस्था और उल्लास के साथ मनाया गया। विद्या, बुद्धि और कला की देवी मां सरस्वती की पूजा-अर्चना प्रदेशभर के मंदिरों, विद्यालयों, महाविद्यालयों एवं शिक्षण संस्थानों में विधि-विधान से की गई।
राजधानी रायपुर सहित बिलासपुर, दुर्ग, भिलाई, कोरबा, अंबिकापुर, जगदलपुर एवं अन्य जिलों में मां सरस्वती की प्रतिमाएं स्थापित कर विशेष पूजा कार्यक्रम आयोजित किए गए। विद्यार्थियों ने मां सरस्वती से विद्या, विवेक और उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
बसंत पंचमी के अवसर पर कई शिक्षण संस्थानों में विद्यारंभ संस्कार कराया गया, जहां नन्हे बच्चों को अक्षर ज्ञान की शुरुआत कराई गई। शिक्षकों एवं विद्वानों ने कहा कि मां सरस्वती ज्ञान के साथ संस्कारों की भी प्रतीक हैं, जिनसे समाज को सही दिशा मिलती है।
इस मौके पर विभिन्न स्थानों पर सांस्कृतिक कार्यक्रम, संगीत, नृत्य एवं कविता पाठ का आयोजन किया गया। पीले वस्त्रों और पुष्पों से सजे पूजा पंडालों में भक्तिमय वातावरण देखने को मिला।
धर्मगुरुओं ने कहा कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक परंपरा में मां सरस्वती की पूजा का विशेष महत्व है और ज्ञान ही सशक्त समाज की नींव है।



