🌍 नई दिल्ली/रायपुर। देश में नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी, फर्जी दस्तावेजों के जरिए जालसाजी, ऑनलाइन फ्रॉड, निवेश के नाम पर धोखाधड़ी, साइबर स्कैम, लोन के नाम पर ठगी तथा अन्य आर्थिक अपराधों की शिकायतें लगातार सामने आती रहती हैं। ऐसे मामलों में कई पीड़ित लंबे समय तक पुलिस, बैंक, न्यायालय और अन्य विभागों के चक्कर लगाने को मजबूर होते हैं।


जनहित में केंद्र एवं राज्य सरकारों से मांग है कि अलग-अलग प्रकार की ठगी और जालसाजी के मामलों की प्रभावी जांच के लिए विशेष प्रशिक्षित जांच टीम अथवा विशेष प्रकोष्ठ को मजबूत किया जाए, ताकि शिकायत से लेकर कार्रवाई और पीड़ित को राहत मिलने तक पूरी प्रक्रिया समयबद्ध तरीके से आगे बढ़ सके।
नौकरी के नाम पर ठगी से लेकर ऑनलाइन स्कैम तक हो जांच
विशेष जांच व्यवस्था में नौकरी लगाने के नाम पर रकम लेने, फर्जी नियुक्ति पत्र देने, सरकारी नौकरी का झांसा देने, फर्जी एजेंसी या कंपनी बनाकर धन वसूलने, ऑनलाइन निवेश के नाम पर ठगी, डिजिटल पेमेंट फ्रॉड, फर्जी लोन, फर्जी दस्तावेज, सोशल मीडिया के माध्यम से धोखाधड़ी तथा संगठित तरीके से किए जा रहे आर्थिक अपराधों को शामिल किया जा सकता है।
ठगी की रकम का पता लगाकर संपत्ति की भी जांच हो
यदि जांच में किसी आरोपी द्वारा अपराध से आर्थिक लाभ प्राप्त करने के पर्याप्त आधार मिलते हैं, तो कानून के अनुसार बैंक खातों, लेन-देन, चल-अचल संपत्ति और अपराध से अर्जित धन की जांच की जाए। जहां कानूनन संभव हो, संबंधित संपत्ति या रकम को सुरक्षित/कुर्क करने की कार्रवाई की जाए और न्यायालय के आदेश तथा लागू कानूनी प्रक्रिया के अनुसार पीड़ितों को उनकी वैध रकम वापस दिलाने की व्यवस्था की जाए।
पीड़ितों को मिले समयबद्ध न्याय
ऐसे मामलों में केवल आरोपी की गिरफ्तारी ही पर्याप्त नहीं होनी चाहिए। जांच का उद्देश्य यह भी हो कि—
- पीड़ित की शिकायत तत्काल दर्ज हो।
- डिजिटल एवं वित्तीय साक्ष्यों को समय पर सुरक्षित किया जाए।
- ठगी की रकम किस खाते या व्यक्ति तक पहुंची, इसका पता लगाया जाए।
- पूरे नेटवर्क और सहयोगियों की भूमिका की जांच हो।
- अपराध से अर्जित संपत्ति की वैधानिक जांच की जाए।
- लंबित मामलों की नियमित समीक्षा हो।
- कानून के अनुसार पीड़ित को रकम की रिकवरी/वापसी के लिए प्रभावी कार्रवाई हो।
- गंभीर एवं संगठित मामलों में अभियोजन को मजबूत किया जाए।
ऐसा प्रभावी कानून बने कि अपराधियों में कानून का भय हो
सरकार ऐसी व्यवस्था पर विचार करे जिसमें ठगी और जालसाजी के संगठित अपराधों में त्वरित जांच, संपत्ति एवं धन के वैध स्रोत की जांच, अभियोजन और पीड़ित राहत के लिए स्पष्ट समयबद्ध व्यवस्था हो। हालांकि किसी व्यक्ति की संपत्ति जब्त या पीड़ित को रकम लौटाने की कार्रवाई कानून, साक्ष्य और सक्षम न्यायालय/प्राधिकरण की प्रक्रिया के अनुसार ही होनी चाहिए।
सरकार से जनहित में मांग
केंद्र और सभी राज्य सरकारें ठगी-जालसाजी के मामलों के लिए विशेष जांच व्यवस्था को मजबूत करें, साइबर एवं वित्तीय जांच विशेषज्ञों को जोड़ा जाए और पुराने लंबित मामलों की समीक्षा कर पीड़ितों को शीघ्र न्याय दिलाने की दिशा में प्रभावी कदम उठाए जाएं।
ठगी करने वालों के खिलाफ ऐसी कानूनी और संस्थागत व्यवस्था जरूरी है जिसमें अपराध की जांच केवल कागजों तक सीमित न रहे, बल्कि अपराध से जुड़े पूरे नेटवर्क और धन के प्रवाह तक पहुंचे।
जनहित में सवाल यही है—पीड़ित की मेहनत की कमाई कब वापस मिलेगी और ठगी के संगठित नेटवर्क पर कब पूरी तरह प्रभावी कार्रवाई होगी?
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