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मिलावट, निर्माण भ्रष्टाचार और अस्पतालों की गंभीर लापरवाही—जवाबदेही तय करने के लिए बने विशेष जनहित कानून…

जनता की जान से खिलवाड़ पर अब कानून हो सख्त!

सत्य ज्ञान समागम न्यूज लाइव

न्यूज पोर्टल पत्रकार संघ भारत

विशेष संपादकीय | जनहित की आवाज

देश में विकास की बात लगातार होती है, लेकिन विकास की पहली शर्त है—जनता की सुरक्षा।

खाद्य पदार्थों में मिलावट हो, सड़क-पुल निर्माण में भ्रष्टाचार हो या अस्पतालों में मरीजों के साथ गंभीर लापरवाही—इन सभी मामलों का अंतिम नुकसान आम नागरिक को उठाना पड़ता है।

इसलिए अब समय आ गया है कि केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर एक मजबूत “जनहित जवाबदेही कानून” बनाने पर गंभीरता से विचार करें।

मिलावटखोरों पर कठोर कार्रवाई

खाने-पीने की वस्तुओं में जानबूझकर खतरनाक मिलावट करने वालों के खिलाफ केवल जुर्माना और लाइसेंस कार्रवाई पर्याप्त नहीं होनी चाहिए।

यदि जांच में यह साबित हो कि किसी व्यक्ति या संस्था ने जानबूझकर ऐसी मिलावट की जिससे लोगों के स्वास्थ्य को गंभीर नुकसान हुआ, तो आर्थिक दंड, नुकसान की भरपाई और कानून के अनुसार कठोर आपराधिक कार्रवाई का स्पष्ट प्रावधान होना चाहिए।

सड़क और पुल निर्माण में भ्रष्टाचार पर जवाबदेही

जनता के टैक्स से बनने वाली सड़क, पुल, नाली और सरकारी इमारतें केवल कागज पर नहीं, बल्कि मजबूत और सुरक्षित जमीन पर दिखाई देनी चाहिए।

यदि घटिया सामग्री, फर्जी गुणवत्ता प्रमाणन, मिलीभगत या जानबूझकर मानकों की अनदेखी साबित होती है, तो केवल ठेकेदार ही नहीं, बल्कि जिस अधिकारी या एजेंसी की जिम्मेदारी जांच और गुणवत्ता सुनिश्चित करने की थी, उसकी भूमिका की भी स्वतंत्र जांच होनी चाहिए।

और यदि भ्रष्टाचार या गंभीर लापरवाही से जनहानि होती है, तो दोष सिद्ध होने पर कानून के अनुसार कठोर कार्रवाई हो।

अस्पतालों में मरीज सर्वोच्च

अस्पताल में पहुंचने वाला व्यक्ति व्यवस्था पर विश्वास करके अपना इलाज कराता है।

इसलिए गंभीर चिकित्सकीय लापरवाही, फर्जीवाड़ा, रिकॉर्ड में हेरफेर, अनावश्यक आर्थिक शोषण या अन्य गैरकानूनी कृत्यों के मामलों में निष्पक्ष एवं स्वतंत्र जांच और दोष सिद्ध होने पर उचित कानूनी कार्रवाई जरूरी है।

साथ ही ईमानदारी से सेवा करने वाले डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों के अधिकारों की रक्षा भी कानून में सुनिश्चित होनी चाहिए, ताकि गलत कार्रवाई और वास्तविक लापरवाही के बीच स्पष्ट अंतर रहे।

कानून ऐसा हो—डर अपराधी को हो, ईमानदार को नहीं

प्रस्तावित कानून में यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि—

◆ दोष सिद्ध होने से पहले किसी को अपराधी न माना जाए।
◆ स्वतंत्र जांच और वैज्ञानिक प्रमाण अनिवार्य हों।
◆ सरकारी धन की हानि होने पर कानून के अनुसार वसूली की व्यवस्था हो।
◆ दोषी अधिकारी, ठेकेदार या संस्था की भूमिका स्पष्ट रूप से तय हो।
◆ जनहानि के मामलों में समयबद्ध जांच हो।
◆ शिकायतकर्ता और गवाहों की सुरक्षा का प्रावधान हो।
◆ जांच में राजनीतिक या प्रशासनिक दबाव की गुंजाइश कम हो।

मुख्यमंत्री से प्रधानमंत्री तक—अब जवाबदेही पर राष्ट्रीय बहस हो

क्या जनता के स्वास्थ्य, सुरक्षा और सरकारी धन से जुड़े मामलों में जवाबदेही की व्यवस्था को और मजबूत करने की जरूरत नहीं है?

क्या मिलावटखोरी, भ्रष्ट निर्माण और गंभीर सार्वजनिक सेवा लापरवाही के मामलों में एक समान कठोर जवाबदेही का ढांचा नहीं होना चाहिए?

यह किसी एक राजनीतिक दल या सरकार के खिलाफ सवाल नहीं है।

यह जनता के जीवन, स्वास्थ्य और टैक्स के पैसे की सुरक्षा का सवाल है।

सत्य ज्ञान समागम न्यूज लाइव की जनहित मांग

केंद्र सरकार और सभी राज्य सरकारें इस विषय पर विशेषज्ञ समिति गठित करें।

न्यायविदों, चिकित्सकों, इंजीनियरों, प्रशासनिक अधिकारियों, उपभोक्ता संगठनों और नागरिक प्रतिनिधियों से सुझाव लेकर ऐसा कानून तैयार किया जाए, जिसमें अपराध की गंभीरता के अनुसार स्पष्ट जिम्मेदारी, पारदर्शी जांच, आर्थिक क्षतिपूर्ति और कानून के अनुरूप कठोर दंड की व्यवस्था हो।

हमारा सवाल सीधा है—

“जनता की जान, जनता का स्वास्थ्य और जनता का पैसा—इन तीनों से खिलवाड़ करने वालों की जवाबदेही आखिर कब तय होगी?”

अब जरूरत सिर्फ कानून की नहीं, बल्कि ऐसे कानून की है जो लागू भी हो और निष्पक्ष रूप से लागू हो।

— सतपाल सिंग भदराजा

प्रधान संपादक
सत्य ज्ञान समागम न्यूज लाइव
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