👉 बेमेतरा, जशपुर, डोंगरगढ़ और कांकेर में सहेजे जाएंगे पारंपरिक जल स्रोत
🌍 बिलासपुर, 11 सितंबर 2026। छत्तीसगढ़ सरकार ने नगरीय क्षेत्रों में पारंपरिक जल स्रोतों के संरक्षण और जल सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। मिशन अमृत 2.0 के तहत राज्य के चार शहरों में तालाबों के पुनर्जीवन के लिए कुल 22 करोड़ 18 लाख रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति जारी की गई है।


👉 तालाबों के जीर्णोद्धार से जल संरक्षण और भूजल संवर्धन को मिलेगी मजबूती
उप मुख्यमंत्री एवं नगरीय प्रशासन मंत्री श्री अरुण साव के अनुमोदन के बाद राज्य शहरी विकास अभिकरण (SUDA) ने इन परियोजनाओं को मंजूरी दी है। योजना के तहत तालाबों का पुनर्जीवन, जीर्णोद्धार, जल संरक्षण तथा भूजल संवर्धन से जुड़े कार्य किए जाएंगे।
चार तालाबों के लिए अलग-अलग राशि स्वीकृत
मिशन अमृत 2.0 के वॉटर बॉडी रिज्यूविनेशन घटक के अंतर्गत स्वीकृत राशि इस प्रकार है—
- जशपुर नगर पालिका: वार्ड क्रमांक-9 स्थित सती तालाब — 4.17 करोड़ रुपये
- कांकेर नगर पालिका: वार्ड क्रमांक-19, अघननगर स्थित दुधावा तालाब — 5.04 करोड़ रुपये
- अहिवारा नगर पालिका: छटवा तालाब — 9.60 करोड़ रुपये
- डोंगरगढ़ नगर पालिका: सिंघोला बांधा तालाब — 3.38 करोड़ रुपये
इन परियोजनाओं की स्वीकृत राशि में 5 वर्षों के संचालन एवं संधारण (O&M) का प्रावधान भी शामिल है।
गुणवत्ता और पारदर्शिता पर सरकार की नजर
निर्माण कार्यों की निगरानी भारत सरकार द्वारा नियुक्त थर्ड पार्टी इंडिपेंडेंट रिव्यू एंड मॉनिटरिंग एजेंसी (IRMA) के माध्यम से की जाएगी। उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव ने संबंधित निकायों को कार्यों में गुणवत्ता, पारदर्शिता और निर्धारित समय-सीमा का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के मार्गदर्शन में राज्य सरकार शहरी क्षेत्रों को स्वच्छ, हरित और जल-सुरक्षित बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। अमृत मिशन 2.0 का उद्देश्य पारंपरिक जल स्रोतों को पुनर्जीवित करना और आने वाली पीढ़ियों के लिए जल सुरक्षा की मजबूत नींव तैयार करना है।
तालाब बचेंगे तो मजबूत होगी जल सुरक्षा
नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के प्रमुख सचिव श्री सोनमणि बोरा ने कहा कि तालाब केवल पानी जमा करने के स्थान नहीं हैं, बल्कि वे पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने और भूजल स्तर को बेहतर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
उन्होंने कहा कि तालाबों के पुनर्जीवन से जल संरक्षण, भूजल संवर्धन और नगरीय पर्यावरण को मजबूती मिलेगी। साथ ही नागरिक सुविधाओं और शहरों की पर्यावरणीय गुणवत्ता में भी सुधार आएगा।
उन्होंने संबंधित नगरीय निकायों को स्वीकृत प्राक्कलन और निर्धारित मापदंडों के अनुरूप सभी कार्य गुणवत्तापूर्वक पूरा करने के निर्देश दिए हैं।
जनहित का सवाल: तालाब बचेंगे, तभी शहरों का भविष्य सुरक्षित रहेगा
तालाबों का संरक्षण केवल सौंदर्यीकरण का विषय नहीं, बल्कि भविष्य की जल सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण से जुड़ा महत्वपूर्ण कदम है। ऐसे में इन परियोजनाओं के क्रियान्वयन में गुणवत्ता, पारदर्शिता और समय-सीमा की निगरानी बेहद महत्वपूर्ण होगी।
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