👉 जनता की थाली में जहर परोसने वालों को बख्शा न जाए! खाद्य सुरक्षा विभाग नियमित करे औचक निरीक्षण, खाद्य पदार्थों के नमूने लेकर हो लैब जांच; आखिर आम नागरिक की सेहत की जिम्मेदारी किसकी?


🌍 बिलासपुर, छत्तीसगढ़।:- आम नागरिक प्रतिदिन अपनी मेहनत की कमाई से होटल, रेस्टोरेंट, ढाबा, मिठाई दुकान, किराना दुकान, डेयरी, बेकरी, चाट-गुपचुप सेंटर और सड़क किनारे लगने वाले खाद्य ठेलों से खाने-पीने की वस्तुएं खरीदता है। लेकिन क्या उपभोक्ता को यह भरोसा है कि उसे मिलने वाला भोजन स्वच्छ, सुरक्षित और मिलावट रहित है?
यह सवाल आज बिलासपुर की जनता के स्वास्थ्य और खाद्य सुरक्षा से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय बन गया है।
सत्य ज्ञान समागम न्यूज लाइव के माध्यम से जिला प्रशासन, कलेक्टर बिलासपुर और खाद्य सुरक्षा विभाग से मांग है कि शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक सभी खाद्य प्रतिष्ठानों की नियमित और प्रभावी जांच सुनिश्चित की जाए।
हर खाद्य दुकान की हो नियमित जांच
खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम निम्न प्रतिष्ठानों का औचक निरीक्षण करे:
- होटल, रेस्टोरेंट और ढाबे।
- मिठाई और नमकीन की दुकानें।
- दूध, दही, पनीर और डेयरी प्रतिष्ठान।
- बेकरी और केक की दुकानें।
- किराना और खाद्य सामग्री की दुकानें।
- चाट, गुपचुप, समोसा और फास्ट फूड सेंटर।
- सड़क किनारे खाद्य पदार्थ बेचने वाले ठेले।
- ऑनलाइन फूड सप्लाई और पैक्ड फूड विक्रेता।
जांच में इन बातों पर विशेष ध्यान दिया जाए
- खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और मिलावट।
- एक्सपायरी डेट और पैकेजिंग की स्थिति।
- भोजन बनाने और रखने की स्वच्छता।
- इस्तेमाल होने वाले तेल की गुणवत्ता।
- दूध, पनीर, घी, मसाले और मिठाइयों के नमूने।
- खाद्य कारोबार का वैध FSSAI लाइसेंस या पंजीयन।
- खाद्य प्रतिष्ठानों में स्वच्छ पानी और साफ-सफाई की व्यवस्था।
- खाद्य पदार्थों पर गलत जानकारी और भ्रामक लेबलिंग।
दोषी पाए जाने पर हो कठोर कानूनी कार्रवाई
केवल निरीक्षण करके लौट जाना पर्याप्त नहीं है। यदि किसी प्रतिष्ठान में मिलावट, असुरक्षित खाद्य पदार्थ या गंभीर अनियमितता पाई जाती है तो खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के तहत नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
दोष की गंभीरता के अनुसार जुर्माना, लाइसेंस निलंबन या रद्द करने तथा अन्य वैधानिक कार्रवाई की जाए। गंभीर मामलों में कानून के अनुसार अभियोजन भी चलाया जाए।
किसी व्यापारी को केवल इसलिए संरक्षण नहीं मिलना चाहिए कि उसकी दुकान बड़ी है या उसका प्रभाव है। वहीं ईमानदारी से व्यवसाय करने वाले दुकानदारों को अनावश्यक परेशान भी नहीं किया जाना चाहिए।
कलेक्टर और खाद्य सुरक्षा विभाग से 7 मांगें
- बिलासपुर जिले में विशेष खाद्य सुरक्षा जांच अभियान चलाया जाए।
- शहर के साथ ग्रामीण क्षेत्रों की दुकानों का भी निरीक्षण हो।
- संदिग्ध खाद्य पदार्थों के नमूने लेकर अधिकृत प्रयोगशाला में जांच कराई जाए।
- जांच में दोषी पाए जाने वाले प्रतिष्ठानों पर कानून के अनुसार कठोर कार्रवाई हो।
- खाद्य दुकानों में FSSAI लाइसेंस/पंजीयन और उपभोक्ता शिकायत संबंधी QR कोड प्रदर्शित कराने के निर्देशों का पालन सुनिश्चित हो।
- विभाग अपनी जांच और कार्रवाई की जानकारी नियमित रूप से सार्वजनिक करे।
- आम नागरिकों की शिकायत पर समयबद्ध कार्रवाई और शिकायत की स्थिति बताने की व्यवस्था हो।
जनता के लिए जरूरी शिकायत नंबर
आधिकारिक शिकायत माध्यम
1. छत्तीसगढ़ खाद्य सुरक्षा हेल्पलाइन एवं व्हाट्सऐप 9340597097 FSSAI की राज्य हेल्पडेस्क सूची में छत्तीसगढ़ के लिए दर्ज नंबर।
2. FSSAI राष्ट्रीय टोल-फ्री हेल्पलाइन 1800-11-2100
3. राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन 1915
WhatsApp शिकायत: 8800001915
4. ऑनलाइन खाद्य सुरक्षा शिकायत
5. उपभोक्ता शिकायत पोर्टल
शिकायत करते समय क्या जानकारी दें?
- दुकान या प्रतिष्ठान का नाम और पूरा पता।
- खाद्य पदार्थ का नाम।
- खरीद की तारीख और बिल, यदि उपलब्ध हो।
- मिलावट या गंदगी की फोटो अथवा वीडियो।
- पैकेट, बैच नंबर और एक्सपायरी डेट, यदि लागू हो।
शिकायत दर्ज करने के बाद प्राप्त शिकायत क्रमांक सुरक्षित रखें और कार्रवाई की स्थिति ट्रैक करें।
विशेष जनहित सवाल
जब सरकार नागरिकों को सुरक्षित भोजन उपलब्ध कराने के लिए कानून और विभाग बनाती है, तो फिर खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता की नियमित निगरानी क्यों न हो?
क्या खाद्य सुरक्षा विभाग बिलासपुर में ऐसा अभियान चला सकता है जिसमें हर क्षेत्र की खाद्य दुकानों की जांच हो और नियम तोड़ने वालों के विरुद्ध कार्रवाई का सार्वजनिक विवरण जारी किया जाए?
याद रखिए, मिलावटी भोजन केवल व्यापार में धोखाधड़ी नहीं, बल्कि आम नागरिक के स्वास्थ्य के साथ गंभीर खिलवाड़ है। जनता की थाली सुरक्षित रखना प्रशासन और खाद्य सुरक्षा विभाग की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।
सत्य ज्ञान समागम न्यूज लाइव
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न पक्ष, न विपक्ष — केवल निष्पक्ष जनहित।








