सत्य ज्ञान समागम न्यूज़ लाइव जनहित की आवाज — समस्या और समाधान दोनों


प्रधान संपादक — सतपाल सिंह भदराजा
🌍 बिलासपुर। गणेश चतुर्थी भगवान श्री गणेश को समर्पित पावन पर्व है। सनातन परंपरा में किसी भी शुभ कार्य से पहले श्री गणेश की पूजा का विशेष महत्व माना गया है। भगवान गणेश को विघ्नहर्ता, मंगलकर्ता, बुद्धि और विवेक के देवता के रूप में पूजा जाता है।गणेश चतुर्थी के प्रमुख लाभधार्मिक मान्यताओं के अनुसार गणेश चतुर्थी पर श्रद्धापूर्वक भगवान गणेश की पूजा करने से—घर में सुख, शांति और सकारात्मक वातावरण बना रहता है।बुद्धि, विवेक और एकाग्रता के लिए भगवान गणेश का आशीर्वाद प्राप्त होता है।कार्यों में आने वाली बाधाओं को दूर करने की प्रार्थना की जाती है।परिवार में प्रेम, सद्भाव और समृद्धि की भावना बढ़ती है।विद्यार्थियों को पढ़ाई और ज्ञान के क्षेत्र में आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती है।नए कार्य की शुरुआत में सफलता और शुभता की कामना की जाती है।गणेशोत्सव समाज में एकता, भाईचारे और सेवा भावना को बढ़ावा देता है।ये धार्मिक मान्यताएं हैं; इन्हें वैज्ञानिक रूप से सिद्ध लाभ के रूप में नहीं लेना चाहिए।भगवान गणेश की लघु कथापौराणिक कथा के अनुसार माता पार्वती ने अपने शरीर के उबटन से एक बालक की रचना की और उसे अपना द्वारपाल बनाया। उन्होंने गणेश जी को आदेश दिया कि उनकी अनुमति के बिना किसी को अंदर प्रवेश न करने दें।उसी समय भगवान शिव वहां पहुंचे। गणेश जी ने उन्हें अंदर जाने से रोक दिया। इस पर भगवान शिव और गणेश जी के बीच युद्ध हुआ और भगवान शिव ने क्रोध में गणेश जी का सिर अलग कर दिया।माता पार्वती के दुख और क्रोध को देखकर भगवान शिव ने गणेश जी को पुनर्जीवन देने का वचन दिया। इसके बाद हाथी का सिर लगाकर गणेश जी को पुनः जीवित किया गया और उन्हें प्रथम पूज्य होने का आशीर्वाद मिला।इसी कारण किसी भी शुभ कार्य से पहले भगवान गणेश का स्मरण और पूजन करने की परंपरा मानी जाती है। आस्था के साथ प्रकृति की रक्षागणेशोत्सव को श्रद्धा के साथ मनाते हुए पर्यावरण संरक्षण का भी संकल्प लें। मिट्टी की प्रतिमा, प्राकृतिक सजावट और स्वच्छ विसर्जन को प्राथमिकता देकर हम धार्मिक आस्था के साथ प्रकृति की रक्षा में भी योगदान दे सकते हैं। मंगलकामनाइस पावन गणेश चतुर्थी पर भगवान श्री गणेश सभी प्रदेशवासियों के जीवन से विघ्न दूर करें और सुख, शांति, बुद्धि, समृद्धि एवं सद्भाव प्रदान करें।गणपति बप्पा मोरया!






