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रायपुर में प्रतिबंधित गुटखे का करोड़ों का कारोबार! खमतराई में 2 करोड़ रुपये का माल जब्त, आखिर किसके संरक्षण में फल-फूल रहा था अवैध नेटवर्क?
🌍 2 नवंबर 2026 | रायपुर, छत्तीसगढ़।छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में प्रतिबंधित गुटखे के अवैध कारोबार का एक बड़ा मामला सामने आया है। खमतराई थाना क्षेत्र में पुलिस की कार्रवाई के दौरान लगभग 2 करोड़ रुपये कीमत का प्रतिबंधित गुटखा जब्त किए जाने की खबर है। इस कार्रवाई के बाद अवैध गुटखा कारोबार, उसके निर्माण, भंडारण और सप्लाई नेटवर्क को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, मुखबिर से मिली सूचना के आधार पर पुलिस ने संबंधित ठिकाने पर छापेमारी की थी। मौके से भारी मात्रा में गुटखे का स्टॉक बरामद किया गया। इसके बाद राज्य एवं केंद्रीय GST विभाग को मामले की जानकारी दी गई। अब माल के स्रोत, खरीद-बिक्री, परिवहन और संभावित टैक्स अनियमितताओं की जांच की जा रही है।
- दो करोड़ का गुटखा आखिर आया कहां से?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि प्रतिबंधित गुटखे की इतनी बड़ी खेप रायपुर तक कैसे पहुंची?
क्या इसका निर्माण छत्तीसगढ़ में ही किया जा रहा था या दूसरे राज्यों से इसकी सप्लाई की जा रही थी?
जांच में निम्न बिंदुओं को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
गुटखे का वास्तविक निर्माता कौन है?
माल किस रास्ते से रायपुर पहुंचा?
किन व्यापारियों और वितरकों का इसमें संबंध है?
गोदाम में माल रखने के लिए कौन जिम्मेदार था?
क्या खरीद-बिक्री के वैध दस्तावेज उपलब्ध हैं?
क्या फर्जी बिलिंग या टैक्स चोरी की गई है?
- पहले भी सामने आ चुका है अवैध गुटखा निर्माण का मामला
रायपुर में यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले 26 सितंबर 2026 को DGGI की टीम ने शदाणी दरबार मार्केट स्थित एक गोदाम में कार्रवाई की थी। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार वहां से 50 से अधिक बोरे सितार ब्रांड का गुटखा बरामद किया गया था।
इसके अतिरिक्त दुर्ग जिले के कुम्हारी क्षेत्र में भी गुटखा निर्माण से संबंधित फैक्ट्री पर कार्रवाई की खबर सामने आई थी। वहां से दो मशीनें और लगभग 30 बोरे तैयार गुटखा जब्त किए जाने की जानकारी प्रकाशित हुई थी।
लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाएं इस बात की आवश्यकता बताती हैं कि केवल गोदामों पर छापेमारी तक कार्रवाई सीमित न रहे, बल्कि निर्माण से लेकर अंतिम बिक्री तक पूरे नेटवर्क की जांच हो।
- GST विभाग की भूमिका और जवाबदेही पर सवाल
सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो में GST विभाग से कथित सांठगांठ के आरोप भी लगाए जा रहे हैं।
हालांकि, अभी तक इन आरोपों की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है।
फिर भी प्रशासन को इन आरोपों की निष्पक्ष जांच करनी चाहिए।
यदि किसी अधिकारी, कर्मचारी या अन्य जिम्मेदार व्यक्ति की मिलीभगत प्रमाणित होती है, तो उसके विरुद्ध भी नियमानुसार कठोर कार्रवाई होनी चाहिए।
सवाल यह है कि यदि प्रतिबंधित उत्पादों का कारोबार लंबे समय से चल रहा था, तो संबंधित निगरानी व्यवस्था को इसकी जानकारी पहले क्यों नहीं मिली?
- प्रतिबंधित गुटखा स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा
तंबाकू और निकोटीन युक्त गुटखे का सेवन मुंह, गले और अन्य गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ाता है।
भारत में खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के अंतर्गत बनाए गए नियमों के अनुसार खाद्य पदार्थों में तंबाकू और निकोटीन का उपयोग प्रतिबंधित है।
इसलिए ऐसे उत्पादों का अवैध निर्माण, भंडारण और वितरण सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए गंभीर चिंता का विषय है।
- छत्तीसगढ़ शासन और संबंधित विभागों से सीधे सवाल
हमारे समाचार पोर्टल के माध्यम से शासन-प्रशासन से निम्न सवालों पर जवाब अपेक्षित हैं:
- जब्त किए गए गुटखे का निर्माता कौन है?
- इस कारोबार के मुख्य संचालकों की पहचान हुई या नहीं?
- क्या दूसरे राज्यों से आने वाली गुटखे की सप्लाई की जांच हो रही है?
- क्या संबंधित कारोबारियों के GST रिटर्न और वित्तीय लेन-देन की जांच होगी?
- क्या अवैध निर्माण इकाइयों की पहचान के लिए विशेष अभियान चलाया जाएगा?
- क्या खाद्य सुरक्षा विभाग ने जब्त उत्पादों के नमूने जांच के लिए भेजे हैं?
- क्या संबंधित अधिकारियों की भूमिका की भी जांच होगी?
- जब्त माल को दोबारा बाजार में पहुंचने से रोकने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं?
- हमारी प्रमुख मांगें
छत्तीसगढ़ शासन, मुख्यमंत्री, गृह विभाग, पुलिस मुख्यालय, वाणिज्यिक कर विभाग एवं खाद्य एवं औषधि प्रशासन से मांग है कि:
पूरे मामले की निष्पक्ष उच्चस्तरीय जांच कराई जाए।
अवैध गुटखा निर्माण और सप्लाई नेटवर्क का पर्दाफाश किया जाए।
संबंधित कारोबारियों के वित्तीय लेन-देन की जांच हो।
संभावित टैक्स चोरी और फर्जी बिलिंग की पड़ताल की जाए।
यदि किसी अधिकारी की मिलीभगत प्रमाणित होती है तो उसके विरुद्ध भी कार्रवाई हो।
प्रदेशभर में प्रतिबंधित गुटखा निर्माण और भंडारण के विरुद्ध अभियान चलाया जाए।
जांच और कार्रवाई की जानकारी सार्वजनिक की जाए।
संपादकीय टिप्पणी
छत्तीसगढ़ की राजधानी में करोड़ों रुपये के प्रतिबंधित गुटखे की बरामदगी सामान्य घटना नहीं है। यह प्रशासनिक निगरानी, खाद्य सुरक्षा और अवैध कारोबार पर नियंत्रण की व्यवस्था के सामने गंभीर चुनौती है।
सरकार को यह स्पष्ट करना होगा कि प्रतिबंधित उत्पादों का कारोबार करने वालों के विरुद्ध कार्रवाई केवल जब्ती तक सीमित रहेगी या इस अवैध कारोबार की जड़ तक पहुंचकर पूरे नेटवर्क को समाप्त किया जाएगा।
जनता को भाषण नहीं, धरातल पर कार्रवाई चाहिए। कानून का पालन आम नागरिक से लेकर बड़े कारोबारियों और जिम्मेदार अधिकारियों तक सभी के लिए समान होना चाहिए।
हमारी अपील
नशामुक्त समाज के निर्माण में सहयोग करें। प्रतिबंधित गुटखा या अवैध नशीले उत्पादों के निर्माण, भंडारण अथवा बिक्री की जानकारी मिलने पर संबंधित विभागों को सूचित करें।
प्रस्तुति: विशेष जनहित समाचार
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प्रदेश अध्यक्ष / संस्थापक एवं प्रधान संपादक:
सतपाल सिंह भदराजा
बिलासपुर, छत्तीसगढ़।
संपर्क: 7999279696
संपादकीय स्पष्टीकरण: यह समाचार उपलब्ध मीडिया रिपोर्टों एवं सार्वजनिक सामग्री पर आधारित है। GST विभाग से सांठगांठ, दो ट्रक कच्चा माल और अवैध निर्माण से जुड़े सोशल मीडिया दावों की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। किसी व्यक्ति या अधिकारी को दोषी घोषित नहीं किया जा रहा है। जांच में सामने आने वाले प्रमाण और संबंधित पक्षों का जवाब मिलने पर समाचार अपडेट किया जाएगा।







