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🏠 होम राज्य समाचार प्राचीन शैली में मां सिद्धिदात्री मंदिर का भव्य…

प्राचीन शैली में मां सिद्धिदात्री मंदिर का भव्य निर्माण — राजस्थान के लाल पत्थरों से बनेगा 5 करोड़ की लागत वाला मंदिर…

सरगांव-माण्डूक्य ऋषि की तपोभूमि और उत्तरवाहिनी शिवनाथ नदी के बीच स्थित श्री हरिहर क्षेत्र केदार मदकू द्वीप में मां सिद्धिदात्री का मंदिर एक भव्य प्राचीन शैली में निर्माणाधीन है। यह मंदिर न केवल स्थापत्य की दृष्टि से विशेष होगा, बल्कि धार्मिक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक रूप से भी एक अनोखा केंद्र बनने जा रहा है। मंदिर का निर्माण कार्य पूरी तरह से राजस्थान के बंशी पहाड़पुर की प्रसिद्ध लाल पत्थरों से किया जा रहा है, जिनका उपयोग अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि मंदिर निर्माण में भी हुआ है।

मंदिर की विशेषताएं

मां सिद्धिदात्री मंदिर का निर्माण 40 गुणा 60 वर्गफुट क्षेत्र में किया जा रहा है, जिसकी शिखर की ऊंचाई 51 फीट होगी। निर्माण कार्य राजस्थान के पारंपरिक कारीगरों द्वारा किया जा रहा है, जो इस प्राचीन स्थापत्य शैली में दक्षता रखते हैं। मंदिर निर्माण की अनुमानित लागत लगभग 5 करोड़ रुपये है।

मदकू द्वीप की ऐतिहासिक और धार्मिक पृष्ठभूमि-

यह क्षेत्र आदिकाल से ही ऋषि-मुनियों की तपोभूमि रहा है। वर्ष 2011 में हुए पुरातात्विक उत्खनन में यहां से द्वादश स्मार्तलिंग की श्रृंखला, अष्टभुजी श्री गणेश, चतुर्भुजी श्री उमामहेश्वर, गरुड़ारूढ़ लक्ष्मीनारायण, और मां महिषासुर मर्दिनी जैसी महत्वपूर्ण मूर्तियाँ प्राप्त हुई थीं। यहां अठारह मंदिरों की प्राचीन श्रृंखला आज भी विद्यमान है, जो इस भूमि की सनातन परंपरा और उसकी प्राचीनता को दर्शाती है।

पंचदेव पूजा परंपरा का पुनर्जागरण-
मण्डलेश्वर संत श्री रामरूप दास महात्यागी जी के नेतृत्व में मंदिर निर्माण का यह शुभ कार्य हो रहा है। उन्होंने बताया कि आदिशंकराचार्य ने आठवीं शताब्दी में सनातन धर्म की एकात्मता बनाए रखने के लिए पंचदेव (शिव, विष्णु, गणेश, सूर्य और शक्ति) पूजा की परंपरा की स्थापना की थी। पंचदेव एक ही वेदी पर लिंग या पिंडि स्वरूप में स्थापित हों तो वह “स्मार्तलिंग” कहलाता है, और मदकू द्वीप इस परंपरा का महत्वपूर्ण उदाहरण बनता जा रहा है।
ग्रामीण सहभागिता और शक्ति पीठ की स्थापना
मां सिद्धिदात्री मंदिर का निर्माण केवल एक मंदिर निर्माण नहीं, बल्कि जनआस्था का भी प्रतीक है। क्षेत्र के ग्रामीणों ने मिलकर इस कार्य का बीड़ा उठाया है। आसपास के 51 गांवों की ग्राम देवियाँ—जैसे महामाया, शीतला माता, लखनी देवी—की चरण पादुकाएं इस मंदिर में स्थापित की जाएंगी। इस आयोजन के माध्यम से “52 ग्रामदेवी शक्ति पीठ” की परिकल्पना को साकार किया जा रहा है, जो पूरे क्षेत्र को शक्ति उपासना का केंद्र बनाएगा।

अन्य प्रमुख मंदिर और धार्मिक महत्व-
मदकू द्वीप पहले से ही श्री जलेश्वर महादेव, श्री लक्ष्मीनारायण, श्री राधाकृष्ण, और अष्टभुजी श्री गणेश जैसे मंदिरों के लिए प्रसिद्ध है। मां सिद्धिदात्री मंदिर के निर्माण से यह क्षेत्र और अधिक आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और पर्यटन की दृष्टि से समृद्ध होगा।
यह प्राचीन संस्कृति, आध्यात्मिक चेतना और ग्रामीण एकजुटता का अद्भुत संगम है, जो आने वाले समय में मदकू द्वीप को भारत के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल कर देगा।