🌍 बिलासपुर। सिरगिट्टी औद्योगिक क्षेत्र में पर्यावरण को लेकर स्थानीय रहवासियों की शिकायतें सामने आ रही हैं। रहवासियों का कहना है कि राजश्री पान मसाला फैक्ट्री के आसपास के वातावरण में किसी प्रकार के केमिकल अथवा अन्य औद्योगिक प्रभाव की आशंका बनी हुई है।स्थानीय लोगों के अनुसार, कई बार वातावरण में ऐसी स्थिति महसूस होती है जिससे आंखों में जलन अथवा परेशानी होती है। सूत्रों की माने तो उनका यह भी दावा है कि रात के समय घर के बाहर सफेद कपड़े सुखाने पर कपड़ों पर किसी प्रकार के दाग अथवा प्रभाव दिखाई देते हैं।हालांकि इन दावों की वैज्ञानिक पुष्टि स्वतंत्र जांच के बाद ही संभव है, इसलिए मामला गंभीर होने के कारण शासन-प्रशासन एवं पर्यावरण विभाग से तत्काल जांच की मांग उठ रही है। सरकार से प्रमुख मांग केंद्र सरकार और राज्य सरकार मामले का संज्ञान लेते हुए—• संबंधित औद्योगिक इकाई का अचानक निरीक्षण कराया जाए।• हवा की गुणवत्ता की स्वतंत्र वैज्ञानिक जांच कराई जाए।• फैक्ट्री से निकलने वाले धुएं, गैस अथवा अन्य उत्सर्जन की प्रयोगशाला जांच कराई जाए।• आसपास के क्षेत्र में Ambient Air Quality Monitoring कराया जाए।• फैक्ट्री की Consent to Establish/Consent to Operate एवं पर्यावरणीय अनुमतियों की जांच की जाए।• यदि कोई अपशिष्ट अथवा रासायनिक पदार्थ निकलता है तो उसके प्रबंधन एवं निस्तारण की जांच की जाए।• कपड़ों पर कथित प्रभाव और आंखों में जलन संबंधी शिकायतों की वैज्ञानिक जांच कराई जाए।• जांच में प्रदूषण मानकों का उल्लंघन पाए जाने पर पर्यावरण कानूनों के तहत नियमानुसार कार्रवाई की जाए।• जांच रिपोर्ट को सार्वजनिक कर स्थानीय रहवासियों को वास्तविक स्थिति से अवगत कराया जाए।केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के दस्तावेजों के अनुसार, औद्योगिक इकाइयों पर वायु एवं जल प्रदूषण नियंत्रण कानूनों तथा पर्यावरणीय मानकों के अनुपालन की जिम्मेदारी होती है और उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित प्राधिकरण कार्रवाई कर सकते हैं।सवाल यह है कि यदि स्थानीय लोगों की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं, तो संबंधित विभाग मौके पर जाकर वैज्ञानिक जांच कब करेगा?जनता की मांग है—आरोप नहीं, जांच हो; जांच के आधार पर सच्चाई सामने आए और यदि नियमों का उल्लंघन मिले तो जिम्मेदारी तय हो।



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प्रधान संपादक — सतपाल सिंग भदराजा







